education: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की कि ऐसा लग रहा है कि संबंधित संस्थाओं ने अब तक कोई सबक नहीं सीखा है।
याचिकाकर्ता फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने मांग की है कि एनटीए को भंग कर NEET आदि महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त परीक्षा निकाय बनाया जाये।
परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित करने की मांग की गयी है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार NEET परीक्षा में बार-बार पेपर लीक ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। अब NEETकी परीक्षा प्रणाली में सुधार लाते हुए और जवाबदेही तय करना अतिआवश्यक हो गया है।
सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे दुखद करार दिया। कहा किउन्होंने कोई सबक नहीं सीखा। कोर्ट ने कहा कि हमने पूर्व में आदेश पारित किया था। एक कमेटी बनाई गयी थी।
कमेटी की सिफारिशें स्वीकार की गयी थी। इस संदर्भ में एक मॉनिटरिंग कमेटी भी गठित की गयी थी। इन सब बातों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने एनटीए से पूछा कि मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर कितना अमल किया गया।
कोर्ट ने एनटीए को आदेश दिया कि वह इस संबंध में विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल कर जानकारी दे कि 2024 के NEET पेपर लीक विवाद के बाद गठित मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों को किस तरह लागू किया गया।
इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष को निर्देश दिया कि अदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा, हमारा फोकस सिर्फ परीक्षा पर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर है।
































