रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में जिला प्रशासन द्वारा रिम्स की जमीन पर अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है।
इस मामले में मेरा स्पष्ट रूप से कहना है हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अवैध निर्माण को तोड़ा जाए और उक्त जमीन को रिम्स को सौंपा जाए। लेकिन सवाल यह है कि उक्त प्रसंगगत जमीन पर अवैध कब्जा जिला प्रशासन द्वारा कैसे होने दिया गया?
हद तो तब हो गई जब रिम्स की उक्त जमीन का कुछ भाग फर्जी कागज बनाकर बाजार में बेच दिया गया और बिल्डरों ने उक्त जमीन पर अपार्टमेंट बनाकर आम नागरिकों के हाथों फ्लैट बेच दिया।
आम नागरिकों के पास जमीन की इतनी समझ नहीं होती
यह भी सच है कि जब कोई आम नागरिक फ्लैट या जमीन खरीदता है तो यह उनकी जिम्मेवारी नहीं होती है कि जमीन की जांच करें कि जमीन सरकारी या निजी है। आम नागरिक के पास न इतनी समझ होती है और न ही इतने संसाधन कि हर स्तर पर कानूनी जांच पड़ताल कर सके। यह जिम्मेवारी सरकार के सिस्टम की होती है।
बाबूलाल ने उठाए सवाल
- क्या भ्रष्ट सिस्टम जिम्मेवार नहीं?
- रजिस्ट्री: रिश्वत लेकर गलत तरीके से की गई।
- दाखिल-खारिज: अंचलाधिकारी ने जांच नहीं की।
- नक्शा पास: रांची नगर निगम ने अवैध जमीन पर पास किया।
- रेरा एप्रुवल: नियमों को नजरअंदाज कर दिया।
क्या की है मांग
- इस पूरे प्रकरण में शामिल संबंधित रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी और रांची नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल एफआइआर दर्ज की जाए और उन्हें तुरंत निलंबित कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- जिन निर्दोष लोगों ने उक्त अवैध तरीके से निर्मित अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदे हैं, उन्हें सरकार तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराएं।
- यदि सरकार वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हो तो फ्लैट खरीददारों को क्रय मूल्य सरकार वहन करें क्योंकि यह नुकसान सरकार के भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हुआ है, आम जनता की गलती से नहीं।






























