झारखंड हाईकोर्ट ने गैरमजरूआ खास जमीन की रजिस्ट्री पर रोक हटाने का आदेश दिया है, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। सरकार इस मामले में कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकती है।
*हाईकोर्ट का आदेश*
1 मई को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य में गैरमजरुआ खास जमीन की रजिस्ट्री से रोक हटाने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राजस्व निबंधन व भूमि सुधार विभाग की उस अधिसूचना को निरस्त (रद्द) कर दिया, जिसके तहत गैरमजरूआ खास जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई थी।
*सरकार की संभावित कार्रवाई*
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकती है। सरकार का मानना है कि हाईकोर्ट का आदेश राज्य के हितों के विपरीत है और इससे राज्य को नुकसान हो सकता है।
*रैयतों को राहत*
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब गैरमजरुआ खास खाते की रजिस्ट्री करवाने में थोड़ी सहूलियत होगी। इससे राज्य के रैयतों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पहले जमीन का उपयोग या हस्तांतरण करने में कई कानूनी अड़चनों का सामना कर रहे थे।
अब देखना यह है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देती है या नहीं। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देती है, तो इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी।



























