भारत: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर एक अहम खबर आयी है। खबर यह है कि अमेरिका में उनके खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोप वापस लिये जा सकते है। यह दावा ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट भविष्य में 265 मिलियन डॉलर की कथित रिश्वत और धोखाधड़ी की योजना से जुड़े आपराधिक मामले रद्द कर सकता है। जानकारों के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग अगर यह फैसला करता है, तो अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के लिए बड़ी राहत मिल जायेगी।
ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट के सामने आते ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर हल्ला बोला है। आरोप लगाया कि भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील असल में गौतम अडानी की रिहाई का सौदा था।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हमारे कॉम्प्रोमाइज पीएम ने कोई व्यापार समझौता नहीं किया, बल्कि अडानी की रिहाई का सौदा किया है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि 10 मई 2025 को आखिर क्यों राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी के बाद ऑपरेशन सिंदूर बीच में रोक दिया गया था।
अब साफ हो चुका है कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के पक्ष में ट्रेड डील क्यों साइन की थी। आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रीय हित की बजाय राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव के आगे झुकना सही समझा।
याद करें कि न्यूयॉर्क में अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी सहित और अन्य अधिकारियों पर भारत के सबसे बड़े सौर सोलर प्रोजेक्ट से जुड़े अरबों डॉलर के भ्रष्टाचार नेटवर्क को चलाने का आरोप लगाया था।
ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिकी न्याय विभाग अडानी के खिलाफ लगे आरोप वापस लेने की तैयारी कर रहा है।
ब्लूमबर्ग के अनुसार यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सजेंच कमीशन (SEC) भी नवंबर 2024 में अडानी सहित अन्य लोगों के खिलाफ दाय समानांतर नागरिक धोखाधड़ी मामले को निपटाने की दिशा में अग्रसर है।
मामले की तह में जायें, तो नवंबर 2024 में US अभियोजकों ने एक आरोप-पत्र जारी कर गौतम अडानी, भतीजे सागर अडानी सहित अन्य पर भारत के सरकारी अधिकारियों को लगभग 265 मिलियन डॉलर का भुगतान करने वाली रिश्वत की योजना में शामिल होने का आरोप लगाया था।
अभियोजकों के अनुसार भुगतान ऐसे ठेके हासिल करने के लिए हुए थे, जिनसे दो दशकों में लगभग 2 बिलियन डॉलर का लाभहोने की उम्मीद थी।
US अधिकारियों का आरोप था कि गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन ने लोन और बॉन्ड जारी कर 3 बिलियन से ज्यादा राशि जुटाई। यहां तक कि उन्होंने ऋणदाताओं और निवेशकों से कथित भ्रष्टाचार की जानकारी छिपाई।
तत्कालीन US अटॉर्नी ब्रियोन पीस के एक प्रवक्ता ने कहा कि अधिकारियों ने गौतम और सागर अडानी के लिए गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिये थे। वारंट विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करने की योजना बना रहे थे।





























