ईरान डील पर ट्रंप-नेतन्याहू में हॉट टॉक

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देश विदेश: ईरान परमाणु डील पर बातचीत के संदर्भ में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हॉट टॉक होने की बात सामने आ रही है।

सूत्रों के अनुसार फोन पर हुई बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर जम कर भड़ास निकाली। बातचीत मंगलवार को होने की बात सामने आ रही है।

खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को ईरान से जंग आगे न बढ़ाने के लिए फोन किया। इतना सुनते ही नेतन्याहू आपा खो बैठे। दोनों नेताओं के बीच 30 मिनट से ज्यादा देर तक चर्चा।

एक्सियोस के अनुसार नेतन्याहू ने कहा, ईरान पर भरोसा नहीं कर सकते.. ईरान जानबूझकर समय बर्बाद कर रहा है, ताकि उसे फिर से युद्ध के लिए तैयार होने का मौका मिल सके। नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि युद्ध बार-बार नहीं होते।

ट्रंप ने नेतन्याहू को जवाब दिया कि अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में सिर्फ इजराइल ही प्राथमिकता नहीं है। हमने नेतन्याहू की बात सुनने के बाद अन्य पड़ोसी देशों से भी फोन पर बात की है। ये देश भी बातचीत चाहते हैं इसलिए हम (अमेरिका) वार्ता को प्राथमिकता देने जा रहे हैं। ट्रंप ने नेतन्याहू को समझाते हुए कहा, कूटनीति की भी एक दुनिया होती है। उसमें समय लगता है।

एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाला देते हुए जानकारी दी कि ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि कतर और अन्य मध्यस्थ देश एक पत्र के मसौदे पर काम कर रहे हैं इस पर अमेरिका और ईरान दोनों हस्ताक्षर करेंगे। ताकि, औपचारिक रूप से युद्ध समाप्त हो जाये। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप से फोन पर बातचीत के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री फायरथे।

दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच जिन मुद्दों पर डील होने की बातचीत जारी है। उसमें ईरान का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया के परिदृश्य में यह इजराइल के लिए झटका है।

यदि ईरान में इस्लामिक गणराज्य की स्थिति मजबूत हो जायेगी, तो आने वाले समय में इजराइलकी टेंशन बढ़ सकती है। अहम बात यह है कि नेतन्याहू आंतरिक राजनीति में भी उलझे हुए हैं।

इजराइल के विपक्षी नेता नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट हो गये। विपक्ष के ताकतवर नेता नफ्ताली बेन्नेट युद्ध को लेकर लगातार उनकी आलोचना कर रहे हैं।

इसकी काट के लिए नेतन्याहू ईरान में जंग शुरू कर नये सिरे से लोकप्रियता पाना चाहते हैं। नेतन्याहू वर्तमान समय का फायदा उठाना चाहते हैं, क्योंकि ईरान के अधिकतर टॉप लीडर मारे जा चुके हैं। सेना भी लड़खड़ाई हुई है।

 

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