मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जल संरक्षण चौपाल बना “ड्राई फ्रूट चौपाल” — जहां पानी बचाने के संदेश के बीच सरकारी अधिकारियों ने जमकर मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम का उद्देश्य था लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करना, लेकिन सुर्खियों में आ गया वहां के भोज का खर्च। मामला है शहडोल जिले के बुढार जनपद पंचायत का, जहां 1 घंटे की बैठक में ही अफसरों ने 13 किलो ड्राई फ्रूट्स, 6 लीटर दूध, 5 किलो शक्कर और 2 किलो खास देसी घी का “स्वाद” ले डाला। इस मेहमाननवाजी में कुल खर्चा हुआ ₹19,000, जिसका बकायदा बिल भी सामने आया है।
क्या था आयोजन?
यह जल संरक्षण चौपाल, मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य था जल स्रोतों की रक्षा, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा और ग्रामीणों को जल के महत्व के प्रति जागरूक करना। लेकिन इस आयोजन की खबर तब चर्चा में आई जब इसका खानपान खर्च सामने आया।
सूत्रों की मानें तो अधिकारियों और विशेष आमंत्रित मेहमानों के लिए बढ़िया इंतजाम किए गए थे —
- 13 किलो काजू, बादाम, किशमिश व अन्य ड्राई फ्रूट्स
- 6 लीटर दूध व उससे बनी मिठाइयां
- 2 किलो देसी घी और 5 किलो चीनी का उपयोग
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
इस आयोजन की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर जनता ने तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए।
कई लोगों ने तंज कसा कि “जल संरक्षण की बैठक में जल नहीं बचा, बल्कि सरकारी धन बहा दिया गया।”
कुछ लोगों ने पूछा —
“क्या यह जनता के पैसों का सही उपयोग है?”
“क्या ऐसे आयोजनों से पानी बचेगा या लोगों का विश्वास डूबेगा?”
प्रशासन की चुप्पी
अब तक प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आयोजन की सफलता और ‘आतिथ्य परंपरा’ के चलते कुछ खर्च हुए, जिन्हें पंचायत के बजट से वहन किया गया है।
सवाल कई हैं:
- एक घंटे के छोटे से कार्यक्रम में इतनी मात्रा में खाने का सामान क्यों खरीदा गया?
- क्या पंचायत फंड का इस तरह से उपयोग करना वाजिब है?
- ऐसे आयोजनों का असली मकसद क्या है — जल संरक्षण या मेहमानों की सेवा?































