JSSC-JPSC अभ्यर्थियों का सरकार पर हमला, ‘उलगुलान’ की चेतावनी

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झारखंड: जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर जेएसएससी सीजीएल, 11वीं से 13वीं जेपीएससी समेत रद्द की गई अन्य परीक्षाओं को लेकर राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

मंच ने आरोप लगाया कि सरकार के पास परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से जुड़े साक्ष्य होने के बावजूद उन्हें अदालत के समक्ष मजबूती से पेश नहीं किया जा रहा है। मंच ने बताया कि मामले में 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट और 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।

मंच के अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है। वहीं, राज्य सरकार द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

प्रेस वार्ता में मंच के अभ्यर्थियों ने कहा कि राज्य सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपने काउंटर एफिडेविट में परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली होने की बात स्वीकार की है। इसके बावजूद, 17 अगस्त को कैबिनेट द्वारा 22 परीक्षाओं को रद्द करने के पीछे जिन परिस्थितियों और साक्ष्यों को आधार बनाया गया था, उससे संबंधित सीआईडी का इन्वेस्टिगेशन नोट अब तक हाईकोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि 5 अक्टूबर तक भी सरकार ने इस महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य को अदालत के समक्ष क्यों नहीं रखा। मंच के अनुसार, यदि जांच में ठोस साक्ष्य सामने आए हैं तो उन्हें कोर्ट में पेश कर सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।

मंच के अभ्यर्थी पीयूष ने कहा कि सीआईडी की गिरफ्तारियों और जांच से जुड़े कई दावे अखबारों की सुर्खियों में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1400 और 100 अभ्यर्थियों द्वारा प्रश्नपत्र पढ़े जाने जैसे दावे सामने आए हैं, लेकिन इन दावों से जुड़े साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं।

मंच ने आरोप लगाया कि सरकार दोहरे रवैये के साथ काम कर रही है और अदालत में मामले को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। आंदोलन के दौरान, अभ्यर्थियों पर दर्ज एफआईआर को लेकर भी मंच ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है।

मंच के अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और जांच एजेंसियों की कमियों के कारण अदालत से छात्रों के हित में फैसला नहीं आता है, तो छात्र चुप नहीं बैठेंगे। मंच ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है।

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा और छात्रों की मांगों की अनदेखी जारी रही, तो राज्य के लाखों छात्र एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। मंच ने कहा कि जरूरत पड़ी तो बड़े स्तर पर ‘उलगुलान’ किया जाएगा।

 

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