भारत: आगामी एक वर्ष के अंदर भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर परियोजना लागू हो जायेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य भारत की सीमा को अवैध घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पूरी तरह फुल प्रूफ बनाना है।
अमित शाह आज शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित सीमा सुरक्षा बल के वार्षिक रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर में बोल रहे थे। श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रही है। इसके तहत देश के लगभग 6,000 किलोमीटर लंबे संवेदनशील सीमा क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी। अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि बीएसफ की स्थापना के 60वें वर्ष में यह परियोजना देश की सीमाओं को अभेद्य बना देगी।
सरकार (मोदी) पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर एक साल के भीतर मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार करेगी। ड्रोन रडार, स्मार्ट कैमरे, आधुनिक सेंसर, थर्मल इमेजिंग तकनीक और एकीकृत निगरानी प्रणाली तैनात कर दी जायेगी।
अमित शाह ने AI आधारित सर्विलांस सिस्टम और रडार तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी मदद से सीमा पार होने वाली हर संदिग्ध गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी हो पायेगी। श्री शाह बताया कि वर्तमान में पाकिस्तान सीमा पर 93 प्रतिशत से अधिक और बांग्लादेश सीमा पर लगभग 80 प्रतिशत फेंसिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है।
हालांकि, अभी भी कई क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी लगातार चुनौती बनी हुई है। उन्होंने राजस्थान-पाकिस्तान सीमा के संदर्भ में कहा कि हाल के महीनों में यहां ड्रोन स्मगलिंग के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
अमित शाह ने देश में अवैध घुसपैठ के संदर्भ में कहा कि हमारी सरकार भारत की डेमोग्राफी को बदलने की साजिश को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी। देश में मौजूद हर अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे भारत से निकाल बाहर फेका जायेगा।
अमित शाह ने बताया कि इस मामले में केंद्र सरकार जल्द ही त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करेगी।






























