रांची: झारखंड सरकार की ओर से राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इस मौके पर फाइलेरिया जागरूकता के लिए प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी को बूथ स्तर पर और 10 से 25 फरवरी तक स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा खिलाएंगे। फाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जिससे बचाव के लिए दवा का सेवन बेहद जरूरी बताया गया।
इस अभियान को राज्य के 14 जिलों में शुरू किया गया है, जबकि 9 जिलों में यह कार्यक्रम पहले ही पूरा हो चुका है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी मौजूद रहे। उनके साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, डब्ल्यूएचओ (WHO) प्रतिनिधि, पीडीएस पदाधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री इर्फान अंसारी ने कहा कि 9 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन का काम पूरा हो चुका है और 14 जिलों में अभियान की शुरुआत हो गई है। उन्होंने बताया कि 2030 तक झारखंड को फाइलेरिया मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि
खूंटी जिला फाइलेरिया उन्मूलन में टॉप पर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की कि फाइलेरिया की फ्री दवा साल में एक बार जरूर लें, ताकि इस बीमारी से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत किया जा रहा है और नए मेडिकल कॉलेज भी खोले जाएंगे।
इरफान अंसारी ने रिम्स अस्पताल को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रिम्स का विस्तार किया जा रहा है और रिम्स-2 बनाने का वादा भी दोहराया। उन्होंने यह भी बताया कि एक विदेशी निवेशक किडनी अस्पताल खोलना चाहता था, लेकिन रिम्स-2 को लेकर चल रहे विवाद के कारण वह पीछे हट गया।
उन्होंने कांके प्रखंड में मुखिया के पति की फाइलेरिया से हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा कि यह बीमारी कितनी खतरनाक है, इसका यह बड़ा उदाहरण है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, पीडीएस कर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे लोगों को जागरूक करें और दवा खाने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।



























