JSSC भर्ती में 313 पास, 79 महिलाओं की नियुक्ति अटकी

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झारखंड: झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा में सफल 313 में से 79 महिला पर्यवेक्षिकाओं को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। इनकी नियुक्ति का मामला सर्टिफिकेट वेरीफिकेशन के नाम पर उलझा हुआ है। सभी सफल उम्मीदवार सर्टिफिकेट जांच के नाम पर सचिवालय की दौड़ लगा रहे हैं। इनसे अलग-अलग तिथियों का आय प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। इस नियुक्ति परीक्षा में उभरे न्यायिक विवाद के दौरान, यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या महिला के नाम पर 100% सीट को आरक्षित किया जा सकता है। ऐसा करने संवैधानिक है या नहीं।

JSSC ने महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति के लिए 2023 में विज्ञापन प्रकाशित किया था। आयोग द्वारा महिला पर्यवेक्षिका के कुल 444 रिक्त पदों पर नियुक्ति की जानी थी। आयोग ने नियुक्ति पक्रिया पूरा करने के बाद 14-8-2025 को रिजल्ट निकाला। इसमें कुल रिक्त पदों के मुकाबले सिर्फ 313 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया।

आयोग के 131 पदों के लिए कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिला. आयोग द्वारा रिजल्ट जारी करने के बाद वहां सफल उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट की जांच की गयी। जांच के लिए समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों को बुलाया गया था।

सर्टिफिकेट की जांच के बाद JSSC ने सरकार से 313 सफल उम्मीदवारों को नियुक्त करने की अनुशंसा की। इसके बाद सचिवालय में विभाग द्वारा नये सिरे से सफल उम्मीदवारों की जांच की गयी। आयोग द्वारा नियुक्ति के लिए अनुशंसित 313 में से 234 को नियुक्ति पत्र दिया गया। 21-4-2026 को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने इन 234 सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिया। बाकी बचे 79 सफल उम्मीदवार सर्टिफिकेट जांच के लिए सचिवालय की दौड़ लगा रहे हैं। इस क्रम में मौखिक तौर पर किसी से 2023 तो कभी 2026 का आय प्रमाण पत्र मांग रहे हैं।

महिला पर्यवेक्षिका की इस नियुक्ति प्रक्रिया में भी कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी, जो अभी जारी है। 2025 में आयोग द्वारा रिजल्ट जारी होते ही 65 असफल उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में कुल सात याचिकाएं दायर की थी। इन याचिकाओं में नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी गयी थी। साथ ही, परीक्षा के लिए चुने गये विषय पर आपत्ति की गयी थी।

न्यायाधीश आनंदा सेन की अदालत में इन सभी याचिकाओं की सुनवाई संयुक्त रूप से हुई। उन्होंने 28-8-2025 को नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित कर दिया। सुनवाई के दौरान, अधिवक्ता अजीत कुमार ने यह सवाल किया क्या 100% सीट किसी खास जेंडर (महिला या पुरूष) के लिए आरक्षित किया जा सकता है। इस सवाल के बाद न्यायाधीश आनंदा सेन ने सभी याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश की पीठ में स्थानांतरित करने का आदेश दिया, ताकि इस संवैधानिक सवाल पर विचार किया जा सके।

आनंदा सेन के फैसले के आलोक में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की पीठ में हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आनंदा सेन की अदालत द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पर लगायी गयी पाबंदी हटा दी।

साथ ही, यह कहा कि किसी भी महिला याचिकादाता ने 100 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर सवाल नहीं उठाया है। इसलिए इस मुद्दे पर अपने ही स्तर से विचार करना सही नहीं है। न्यायालय ने 24-3-2026 को सभी याचिकाओं को फिर से सिंगल बेंच में भेज दिया, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाये गये सवालों पर विचार किया जा सके।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक हटाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू हुई। पहले राज्य कर्मचारी आयोग में सफल उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट का सत्यापन किया गया। इसके बाद, आयोग ने सभी सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए सरकार से अनुशंसा की।

 

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