रांची: रांची में आगामी 2 अगस्त को आदिवासी एकता महजुटान रैली होगी। इसकी तैयारी की जिम्मेदारी ग्लैडसन डुंगडुंग, शशि पन्ना और अनिल पन्ना को सौंपी गई है। इस बात का निर्णय प्रेस क्लब में आयोजित परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव विषयक संगोष्ठी में लिया गया।
संगोष्ठी में पूर्व मंत्री और झारखंड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड में होने वाले लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का आदिवासी समाज पर किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या घटाने का प्रयास किया गया तो इसका जोरदार विरोध होगा। बंधु तिर्की ने कहा कि संविधान में आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
परिसीमन केवल सीटों के पुनर्गठन का मामला नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के राजनीतिक अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। इसके बाद, संगोष्ठी में सर्वसम्मति से 2 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महजुटान रैली आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में सुखदेव भगत, कालीचरण मुंडा, दयामनी बारला, वासवी किड़ो समेत विभिन्न जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, कानूनी जानकार और राजनीतिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन के दौरान संविधान के अनुच्छेद 330, 332 और पांचवीं अनुसूची का पूरी तरह पालन होना चाहिए।
अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या किसी भी स्थिति में कम नहीं की जानी चाहिए। यदि कुल सीटें बढ़ती हैं तो आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए।






























