झारखंड: झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था को नया ढांचा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड विधानसभा से पारित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही, यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है, जिससे राज्य के विश्वविद्यालयों के संचालन और नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
नए कानून के तहत अब कुलपतियों और प्रति कुलपतियों की नियुक्ति में राज्यपाल के साथ-साथ मुख्यमंत्री की भी समान भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इससे पहले इन नियुक्तियों में राज्यपाल की भूमिका अधिक प्रमुख मानी जाती थी, लेकिन अब इसमें संतुलन स्थापित किया गया है।
इसके अलावा, विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों में राज्य सरकार की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे नीतिगत फैसलों में अधिक समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से लंबित विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का रास्ता भी अब साफ हो गया है, जिसके जरिए शिक्षकों, प्राचार्यों और अन्य कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी।
नए प्रावधानों के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग की भूमिका भी मजबूत होगी और वह विश्वविद्यालयों के कई महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय रहेगा। छात्र हित से जुड़े मुद्दों जैसे छात्र संघ चुनाव, सीनेट बैठकों का संचालन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बदलाव होगा।





























