झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य में बढ़ते धर्मांतरण और बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि हूल दिवस (30 जून) के दिन वीर भूमि भोगनाडीह में आदिवासी समाज के लोग जुटकर आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
चंपाई सोरेन ने कहा कि धर्मांतरण को रोकने के लिए पहल नहीं हुई तो भविष्य में आदिवासी सरना स्थलों में पूजा करने वाला कोई नहीं बचेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति आदिवासी परंपराओं और जीवनशैली को त्याग दे या दूसरे धर्म में विवाह कर ले, उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए आदिवासी समाज की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं और उनकी बेटियों को बहला-फुसलाकर या धमकी देकर शादी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘सीएनटी-एसपीटी एक्ट जैसे सुरक्षा कवच होने के बावजूद इन्हें जमीनें कौन उपलब्ध करा रहा है?’
चंपाई सोरेन ने कहा कि हूल दिवस के बाद आंदोलन तेज होगा और लाखों लोग सड़कों पर उतरेंगे। इसके बाद समाज की भावना से केंद्र सरकार को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।






























