झारखंड: रजरप्पा छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में जो हुआ, उसने कई दिलों को भारी कर दिया।जहां कभी श्रद्धालुओं की भीड़, दुकानों की रौनक और रोज़गार की उम्मीदें थीं, आज वहां मलबा और सन्नाटा दिखाई दिया।254 दुकानों का टूटना सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर सीधा असर है।उन दुकानों के पीछे वर्षों की मेहनत, सपने, संघर्ष और परिवारों का भविष्य जुड़ा था।विकास ज़रूरी है, व्यवस्था भी ज़रूरी, लेकिन, विकास तभी सार्थक है जब उसमें इंसानियत भी शामिल हो।
अगर अतिक्रमण हटाया गया है, तो क्या उन दुकानदारों के पुनर्वास की योजना है?क्या जिन लोगों की जिंदगी आज उजड़ गई, उन्हें दोबारा खड़ा करने की कोई व्यवस्था होगी?सरकार और प्रशासन से विनम्र अपील है कि प्रभावित दुकानदारों के लिए पुनर्वास, वैकल्पिक दुकानें और आर्थिक सहायता पर तुरंत निर्णय लिया जाए।क्योंकि किसी का घर-परिवार उजाड़कर विकास अधूरा रह जाता है।































