फिल्म: “राज कपूर बाहर निकलकर टैक्सी में बैठे, लेकिन उन्होंने देखा कि टैक्सी आगे नहीं जा रही है बल्कि ऊपर की ओर जा रही है। राज कपूर को देखकर मॉस्को में ज़बरदस्त भीड़ इकट्ठा हो गई थी और लोगों ने टैक्सी को कंधों पर उठा लिया था”।
ऋषि कपूर का सुनाया यह क़िस्सा थोड़ा अविश्वसनीय तो लगता है कि क्या ऐसा भी हो सकता है, लेकिन यह बताता है कि राज कपूर पूर्व सोवियत संघ में किस क़दर मशहूर थे और यह लोकप्रियता उन्होंने दशकों की मेहनत से ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फ़िल्मों से कमाई थी। वही ‘श्री 420’ जो आज से 70 साल पहले 6 सितंबर 1955 को रिलीज़ हुई थी।
वही ‘श्री 420’ जिसमें जब गाँव से शहर आया राज (राज कपूर) डिग्री होने के बावजूद नौकरी नहीं ढूँढ पाता और वह रद्दीवाले की दुकान पर अपना मेडल गिरवी रखने चला जाता है, जो उसे ईमानदारी के लिए कभी मिला था।
भारतीय फ़िल्मों को लेकर जिस ग्लोबल लोकप्रियता की बात आज होती है, उसका स्वाद राज कपूर ने भारतवासियों को चखाया था। ईरान, चीन से लेकर पूर्व सोवियत संघ तक इस फ़िल्म और राज कपूर का ज़बरदस्त क्रेज़ हुआ करता था।
इसराइल में भी ‘श्री 420’ के गाने हिट हैं, कई लोग आपको ‘इचक दाना’ सुनाकर दिखा देंगे। जब 2018 में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और उनका दल भारत आया था और बैंड में ‘इचक दाना’ बज रहा था, तो इसराइली दल के लोगों ने बताया था कि उन्हें यह गाना आता है। यह क़िस्सा पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने ख़ुद प्रेस को बताया था।
‘श्री 420’ इतनी मशहूर थी कि इसका प्रीमियर ईरान में भी रखा गया था। सूट-बूट में पहुँचे राज कपूर को देखकर वहाँ की जनता ने ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना शुरू कर दिया था। उज़्बेकिस्तान में यह फ़िल्म आज भी ‘जनॉब 420’ के नाम से मशहूर है।





























