झारखंड: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के आईएफएससी अधिकारियों को आप मानना के मामले में दोषी ठहराया जाने के कारण चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद का तय किया है। बुधवार 23 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान न्याय मूर्ति सूर्यकांत और जे बक्शी की पीठ ने राज्य सरकार के मांगे हुए जवाब की झारखंड में अब तक जमीन के दस्तावेजों का डिजिटलकरण नहीं होने के लिए सवाल खड़े किए।
कपिल सिब्बल ने सरकार का रखा पक्ष
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा जिसमें उन्होंने बताया है कि तेलिया की जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा था वह वन भूमि के अंतर्गत आती है। कपिल सिब्बल ने इससे जुड़े कई दस्तावेज भी कोर्ट को सॉफ्टवेयर है और इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।
उमायुश की ओर से अदालत को तेतुलिया की जमीन की तस्वीर प्रदर्शित की गई जिसमें कहीं पर भी वन क्षेत्र के स्पष्ट होने या पेड़ पौधों का दिखना नहीं हुआ और इसी से उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में राज्य सरकार को कई बार दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया लेकिन सरकार या साबित नहीं कर पाई किया जमीन वास्तव में वन क्षेत्र है।
सरकार की ओर से हाल ही में एक नया शपथ पत्र दाखिल किया गया है जिस पर पक्ष ने जवाब देते हुए समय मांगा है और कोर्ट ने यह समय को स्वीकार भी किया। उसी के बाद कोर्ट ने दो सप्ताह बाद का समय निर्धारित किया।
सुप्रीम कोर्ट की इस सनी ने न केवल अब मानना कैसे तक सीमित रहने का निर्देश दिया है बल्कि झारखंड की भूमि व्यवस्था और तकनीकी आधुनिकीकरण को गंभीर रूप से गति लाने पर भी लगे हुए।






























