बिहार: बिहार की गया सीट से 9वीं बार चुनाव जीतने के बाद डॉ. प्रेम कुमार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए हैं। बिहार विधानसभा सत्र का आज दूसरा दिन है। आज प्रेम कुमार ने अध्यक्ष पद की कमान संभाल ली। सोमवार को उन्होंने नामांकन किया था।
उनके अलावा किसी अन्य ने नामांकन नहीं दिया इसलिए प्रेम कुमार निर्विरोध स्पीकर चुने गए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उन्हें आसन पर बैठाया। विधानसभा में अध्यक्ष की भूमिका को लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने से लेकर विधायी प्रक्रियाओं को दिशा देने तक, अध्यक्ष के पास कई महत्वपूर्ण अधिकार और जिम्मेदारंयां होती हैं। सदन में होने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण और लोकतांत्रिक मूल्यों के पालन को सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक भूमिकाओं में शामिल है।
अध्यक्ष यह तय करते हैं कि सदन में किस सदस्य को कब और कितने समय के लिए बोलने का अवसर दिया जाए। आवश्यक परिस्थितियों में वे सदन की कार्यवाही को स्थगित या निलंबित भी कर सकते हैं। अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारी मानी जाती है। अनुशासन भंग करने वाले सदस्यों के खिलाफ निलंबन या निष्कासन जैसी कार्रवाई का अधिकार भी अध्यक्ष के पास होता है।
दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत किसी विधायक की अयोग्यता से जुड़े मामलों का अंतिम निर्णय भी अध्यक्ष ही लेते हैं। इसके अलावा वे विभिन्न विधानसभा समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति करते हैं और उनके कामकाज की निगरानी करते हैं। कार्यमंत्रणा समिति, नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति जैसी महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता भी स्वयं विधानसभा अध्यक्ष करते हैं।





























