राँची: जिले में आयोजित जनता दरबार एक बार फिर लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरा। सोमवार को हुए इस जनसुनवाई कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए सैकड़ों फरियादियों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट और समयबद्ध निर्देश जारी किए।

इस अवसर पर राहे प्रखंड की रहने वाली गुरुवारी देवी ने जिलाधिकारी का आभार जताते हुए एक भावुक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछली बार जनता दरबार में उन्होंने शिकायत की थी कि उनका बेटा, जिसे अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली है, उनके भरण-पोषण से मुंह मोड़ चुका था। जिलाधिकारी के निर्देश पर अंचल अधिकारी एवं स्थापना प्रभारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्ष से संपर्क किया और आवश्यक कार्रवाई की। इसका नतीजा यह हुआ कि बेटा अपनी गलती मानते हुए मां के भरण-पोषण के लिए तैयार हो गया। यह एक उदाहरण बन गया कि प्रशासनिक पहल कैसे टूटते पारिवारिक रिश्तों को भी जोड़ सकती है।

समस्याओं के समाधान में दिखी तत्परता

जनता दरबार में भूमि विवाद, दोहरी जमाबंदी, पंजी-2 में सुधार, भू-माफिया द्वारा जमीन पर कब्जे की कोशिश, ऑनलाइन रसीद निर्गत न होने, जाति/आय/निवास प्रमाण पत्र से जुड़ी परेशानियों, स्कूलों की समस्याओं और छात्रवृत्ति जैसी जनहित की कई शिकायतें सामने आईं। जिलाधिकारी ने हर फरियादी की बात को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।

जनता दरबार में सहभागिता में हो रहा इज़ाफा

जिलाधिकारी ने कहा कि जनता दरबार का मकसद प्रशासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत बनाना है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि अब नागरिक खुलकर अपनी समस्याएं रखने के लिए आगे आ रहे हैं। जनता दरबार में हर सप्ताह बढ़ती सहभागिता प्रशासन के प्रति लोगों के विश्वास को दर्शाती है। जनता दरबार सिर्फ एक औपचारिक मंच नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रतीक बन चुका है। गुरुवारी देवी जैसे मामलों से यह स्पष्ट हो जाता है कि सही समय पर की गई प्रशासनिक पहल आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया कि इस तरह की जनसुनवाई नियमित रूप से आयोजित की जाती रहेंगी ताकि आम जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष न करना पड़े।

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