झारखंड: झारखंड के धनबाद के बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड मामले में झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को 7 साल बाद राहत मिली जिसमें उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 8 अगस्त को उन्हें जमानत देने का आदेश दिया और संजीव सिंह अपने ही चचेरे भाई और धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या के आरोपी थे और यह मामला 2017 में पूरे झारखंड और देश भर में काफी चर्चित था।
संजीव सिंह को 2017 से ही इस मामले में जेल में बंद कर दिया गया था और यह आरोप है कि 21 मार्च 2017 को दिनदहाड़े दिन बाद के स्टील गेट के पास नीरज सिंह और उनके तीन सहयोगियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी और इस हत्याकांड ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया था जिसमें पुलिस जांच में संजीव सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी और निचली अदालत और हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।
राजनीति और पारिवारिक विवाद का मिलान
नीरज सिंह और संजीव सिंह के बीच लंबे समय से राजनीतिक और पारिवारिक विवाद चल रहा था जिसमें दोनों झरिया के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंधित थे और स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ रखे हुए थे और यह माना जाता है कि वर्चस्व की लड़ाई इस हत्याकांड की जड़ थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद संजीव सिंह के समर्थकों में खुशी है और यह सिर्फ जमानत नहीं बल्कि मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी और नीरज सिंह के परिजन और समर्थक अभी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह मामला कहां तक जाएगा।
































