हिंडालको की 49.60 करोड़ की स्टांप ड्यूटी विवाद की याचिका सुप्रीम कोर्ट में

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रांची: हिंडालको इंडस्ट्रीज से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में अतिरिक्त 49.60 करोड़ रूपये की वसूली का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट से हारने के बाद हिंडालको इंडस्ट्रीज ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अतिरिक्त वसूली का यह विवाद वर्ष 2023 में महालेखाकार द्वारा सरकार को भेजे गये एक पत्र के बाद शुरु हुआ। हिंडालकों को 2015 में कठौतिया कोल माइंस सौंप दिया गया था।

कोल ब्लॉक की नीलामी में सबसे ज्यादा बोली लगाने के बाद पलामू जिले का कठौतिया कोल माइंस हिंडालको इंडस्ट्रीज को मिला था। इसके बाद कंपनी ने नॉमिनेटेड अथॉरिटी के साथ कोयला खदान विकास और उत्पादन समझौते पर हस्ताक्षर किया था। भारत सरकार ने कोयला मंत्रालय ने 23.03.2015 को कठौतिया कोल माइंस हिंडालको को सौंपने का आदेश दिया। इस आदेश के आलोक में कठौतिया कोल माइंस और कोयला वाले क्षेत्र हिंडालको को सौंप दिया गया।

इसके बाद, झारखंड सरकार के संयुक्त सचिव ने 27-7-2015 को आदेश जारी कर कठौतिया कोल माइंस के लिए माइनिंग लीज देने का आदेश दिया। इसके आलोक में मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट 1957 सहित अन्य प्रावधानों के अनुसार 687.92 हेक्टेयर क्षेत्र वाली कठौतिया कोल माइंस का एग्रीमेंट किया गया। रजिस्ट्रेशन के दौरान सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित फीस का भुगतान किया गया।

सक्षम अधिकारी ने माइनिंग लीज के तहत रॉयल्टी के रूप में 1.68 करोड़ रुपये तय किया। इस रकम पर रजिस्ट्रेशन के लिए स्टांप ड्यूटी के रूप में 6.72 करोड़ रुपये निर्धारित किया। कंपनी द्वारा इस रकम का भुगतान करने के बाद रजिस्ट्रेशन हुआ। आठ साल बाद रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी पर विवाद महालेखाकार द्वारा सरकार को भेजे गये एक पत्र के बाद शुरू हुआ। महालेखाकार ने सरकार को पत्र लिख कर कहा कि कोल माइंस के रजिस्ट्रेशन में फीस की गणना करने में सरकार ने गलती है।

महालेखाकार ने सरकार को भेजे गये पत्र में हिंडालकों से कोल माइंस और कोयला वाले क्षेत्र के रजिस्ट्रेशन के लिए स्टांप ड्यटी के रूप में अतिरिक्त 28.34 करोड़ और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 21.25 करोड़ रुपये की वसूली की अनुशंसा की। महालेखाकार के पत्र के आलोक में पलामू के उपायुक्त ने फीस निर्धारित करने के लिए केस (2/24-25) की सुनवाई शुरू की। हिंडालको ने अपना जवाब दिया। लेकिन, उपायुक्त ने महालेखाकार की अनुशंसा के आलोक में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में कुल 49.60 करोड़ रुपये वसूली का आदेश दिया। उपायुक्त के आदेश के आलोक में पलामू के जिला खनन पदाधिकारी ने हिंडालको को नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर यह रकम जमा करने का आदेश दिया।

हिंडालको ने पलामू के उपायुक्त और जिला खनन पदाधिकारी द्वारा जारी किये गये आदेश को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हिंडालको की याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हिंडालको की याचिका खारिज कर दी।

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि “फ़ाइनल प्राइस ऑफर” के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी की दोबारा गणना को बेबुनियाद नहीं कहा जा सकता है। इस नजरिए से संबंधित अधिकारियों द्वारा किये गये फैसले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। हिंडालको ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

 

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