राजनीति: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पास तीन नहीं बल्कि चार पुलिस वाहन है। पुलिस मुख्यालय के एक आधिकारिक सूत्र ने इसकी पुष्टि की है। जबकि, चार दिन पहले डीजीपी को लिखे पत्र में वित्त मंत्री ने यह लिखा था कि उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस के 16 जवान हैं, लेकिन गाड़ी सिर्फ तीन है।
जानकारी के मुताबिक, मंत्री के उपयोग के लिए वर्तमान में जो चार सरकारी वाहन उपलब्ध हैं, इनमें एक जिप्सी, दो नई बोलेरो और एक पुरानी बोलेरो शामिल है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक, एक समय में दो एस्कॉर्ट वाहनों के साथ 10 बॉडीगार्ड मंत्री के साथ चल सकते हैं। जबकि, अन्य सुरक्षा कर्मी रांची के अशोक नगर स्थित आवास और पलामू (बेलवाटीकर) स्थित आवास पर हाउस गार्ड के रूप में तैनात रहते हैं। आवश्यकता पड़ने पर या संवेदनशील क्षेत्रों के दौरे के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा बल और वाहन भी लगाए जा सकते हैं।
ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि यदि सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध हैं, तो डीजीपी को लिखे पत्र में केवल तीन वाहन होने और जवानों को परेशानी होने की बात क्यों कही गई?
उल्लेखनीय है कि झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 29 जून को अपनी सुरक्षा में लगे 16 जवान और तीन सरकारी वाहनों को लौटा दिया था। तीन जुलाई को यह बात सार्वजनिक, तब हुई जब वित्त मंत्री बिना काफिले के ही खेलगांव में एक कार्यक्रम में भी पहुंच गये।
वित्त मंत्री ने ऐसा क्यों किया ये जानने को सब लोग उत्सुक थे। कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल होने लगा, जो मंत्री ने डीजीपी को लिखा था।
डीजीपी को वित्त मंत्री ने 29 जून को लिखे पत्र में कहा कि उनके पास केवल तीन सरकारी वाहन हैं, जबकि, उनकी सुरक्षा में 16 जवान तैनात हैं। पत्र में उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए लिखा कि तीन वाहनों में जवानों को बैठने में दिक्कत होती है और उन्हें एक अन्य गाड़ी उपलब्ध कराया जाए। लेकिन, जब उन्हें गाड़ी उपलब्ध नहीं करायी गयी तो उन्हें सुरक्षा ही लौटा दी।
पत्र लिख बतायी थी वजह
यहां बता दें कि, 29 जून को वित्त मंत्री ने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा कि 16 जवानों के लिए केवल तीन वाहन दिए गए थे। इससे जवानों को एक ही वाहन में अधिक संख्या में बैठना पड़ता था, जो सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं था।
मंत्री ने बताया कि उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को ही एक और वाहन देने की मांग की थी, ताकि सभी जवान सुरक्षित तरीके से सफर कर सकें। लेकिन उनकी मांग पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बजाय उन्हें एक वाहन वापस करने का नोटिस भेज दिया गया।
मंत्री ने अपने पत्र में इसे असहज करने वाला बताया और लिखा कि इसी कारण उन्होंने वाहन सहित सभी पुलिस जवानों को वापस करने का फैसला लिया। मंत्री का कहना है कि उनका फैसला सुरक्षा से ज्यादा व्यवस्था से जुड़ी समस्या को लेकर है। फिलहाल, वे बिना सुरक्षा काफिले के ही अपने सरकारी कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।
हालांकि, उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड और स्पेशल ब्रांच के जवानों की ड्यूटी पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है। उन्हें आवश्यकता पड़ने पर मंत्री आवास पर बुलाया जाता है, लेकिन मंत्री सामान्य कार्यक्रमों में उन्हें अपने साथ लेकर नहीं जा रहे हैं। उनके इस कदम को सरकारी संसाधनों के मितव्ययी उपयोग और सादगीपूर्ण कार्यशैली के रूप में देखा जा रहा है।


































