झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपने 13वें केंद्रीय महाधिवेशन में बड़ा फैसला लेते हुए हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष बनाया है, जबकि शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक की भूमिका सौंपी गई है। यह फैसला पार्टी के महाधिवेशन के दूसरे दिन लिया गया, जिसमें शिबू सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने एक नए युग की शुरुआत की।
*नई भूमिका और जिम्मेदारी*
शिबू सोरेन, जिन्होंने 1987 से झामुमो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है, अब पार्टी के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करेंगे। हेमंत सोरेन, जो वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं, पार्टी की अगुवाई करेंगे और झामुमो को नई दिशा देंगे।
*झामुमो का इतिहास और विस्तार*
झामुमो ने अपने गठन के 53 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस दौरान पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड आंदोलन ने दिल्ली की सत्ता को झकझोर कर रख दिया था और झामुमो ने अलग राज्य के आंदोलन को तेज किया। पार्टी ने जंगलों-पहाड़ों, खेत-खलिहानों से होते हुए शहरों-कस्बों तक अपनी पहुंच बनाई और चुनावी राजनीति में अपनी पकड़ बनाई।
*महाधिवेशन के महत्वपूर्ण बिंदु*
– झामुमो के महाधिवेशन में पार्टी की केंद्रीय समिति भंग कर दी गई और नई संचालन मंडली गठित करने का निर्णय लिया गया।
– पार्टी ने अपने संविधान में बदलाव करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया और संस्थापक संरक्षक का नया पद बनाया।
– शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक और हेमंत सोरेन को केंद्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
*झामुमो के प्रमुख अधिवेशनों की सूची*
– *पहला महाधिवेशन*: 1-2 जनवरी 1983, धनबाद
– *दूसरा महाधिवेशन*: 26-28 अप्रैल 1986, रांची
– *तीसरा महाधिवेशन*: 10-12 मई 1989, दुमका
– *चौथा महाधिवेशन*: 10-12 जून 1994, बोकारो
– *पांचवां महाधिवेशन*: 24-26 जून 1997, जमशेदपुर
– *तेरहवां महाधिवेशन*: 14-15 अप्रैल 2025, रांची
इस बदलाव के साथ, झामुमो एक नए युग की शुरुआत कर रही है, जिसमें हेमंत सोरेन की अगुवाई में पार्टी झारखंड की राजनीति में अपनी उपस्थिति और मजबूत करेगी।





























