भारत: ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने के लिए मुझे कोई पछतावा नहीं है। भारत को विकास की दिशा में ध्यान देना चाहिए। पाकिस्तान के साथ लंबे संघर्ष में उलझना ठीक नहीं। किसी भी कार्रवाई को आतंकवादी शिविरों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। मुझे हैरानी हुई कि भारत सरकार ने वही किया, जैसा मैंने सुझाया था।
यह विचार कांग्रेस सांसद शशि थरूर के हैं, जो उन्होंने आज शनिवार को कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल में व्यक्त किये। तिरुवनंतपुरम से सांसद दर्शकों के सवालों का जवाब दे रहे थे। शशि थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का कभी भी विरोध नहीं किया। बस ऑपरेशन सिंदूर पर मेरा स्टैंड अलग था।
श्री थरूर ने कहा, इस मामले में मेरा बहुत मजबूत स्टैंड था और मैं इसके लिए कोई माफी नहीं मांगनेवाला। शशि थरूर ने कहा कि पहलगाम की आतंकी घटना के बाद, उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में एक कॉलम लिखा था। मैंने लिखा था कि ऐसी घटना को बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता इसका जवाब दिया जाना जरूरी है।
शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि अगर भारत मर जाता है, तो फिर कौन जीवित रहेगा? उनका कहना था कि जब देश की सुरक्षा और दुनिया में उनकी स्थिति का सवाल हो, तो भारत सबसे पहले आता है।
तिरुवनंतपुरम सांसद ने कहा, राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित में सिर्फ भारत को ही जीतना चाहिए। शशि थरूर ने पार्टी मीटिंग में शामिल नहीं होने के सवाल पर कहा, मैं इस बारे में अपनी लीडरशिप को बता चुका हूं। इस बारे में पब्लिक में बात करना सही नहीं होगा।





























