नई दिल्ली। इंडिपेंडेंस डे वीक पर रिलीज हुई प्रतीक गांधी और सनी हिंदुजा स्टारर वेब सीरीज ‘सारे जहां से अच्छा’ अब चर्चा में है, लेकिन वजह दमदार कहानी नहीं बल्कि इसकी कमजोर पकड़ है। गुमनाम जासूसों की रोमांचक दुनिया को दिखाने का दावा करने वाली इस सीरीज में कुल छह एपिसोड हैं, लेकिन दर्शकों के लिए इसे शुरुआत से अंत तक देख पाना चुनौती भरा साबित हो सकता है।

 

कहानी का आधार देश के लिए अपनी पहचान और जान की बाजी लगाने वाले गुप्तचरों के संघर्ष पर है। पहले एपिसोड में कुछ उम्मीदें बंधती हैं, दूसरे में रोमांच थोड़ा बढ़ता है और तीसरे एपिसोड तक दर्शक दिलचस्पी बनाए रखते हैं। लेकिन इसके बाद कहानी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, प्लॉट में खिंचाव आने लगता है और कई दृश्य अनावश्यक रूप से लंबे महसूस होते हैं।

प्रतीक गांधी अपनी अदाकारी में हमेशा की तरह असरदार हैं और सनी हिंदुजा भी किरदार के साथ न्याय करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और लचर एडिटिंग इनकी मेहनत पर पानी फेर देती है। बैकग्राउंड म्यूजिक औसत है और एक्शन सीक्वेंस में वह धार नहीं जो जासूसी थ्रिलर से उम्मीद की जाती है। दर्शकों और समीक्षकों का मानना है कि पहले तीन एपिसोड तक सीरीज पकड़ बनाए रखती है, लेकिन उसके बाद कहानी में नयापन खत्म हो जाता है। नतीजा, जो सीरीज देशभक्ति और थ्रिल से भरपूर हो सकती थी, वह लंबी और थकाऊ लगने लगती है।

कुल मिलाकर, ‘सारे जहां से अच्छा’ एक अधूरी संभावनाओं वाली सीरीज है, जिसे सिर्फ इसके कलाकारों की अदाकारी और शुरुआती एपिसोड के लिए देखा जा सकता है। पूरी सीरीज देखने की हिम्मत हर कोई नहीं जुटा पाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here