रांची: छात्रों और भाजपा के विधानसभा घेराव में बड़ी संख्या में भीड़ बढ़ने और उपद्रव की आशंका के मद्देनजर झारखंड सरकार ने केंद्रीय पारा मिलिट्री फोर्स की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की मांग की थी। सरकार की मांग पर जमशेदपुर से रैफ की दो कंपनियां रांची पहुंच भी गई थी। लेकिन, उन्हें तैनात करने की अनुमति नहीं मिली। इस कारण रैफ की दोनों कंपनियों का इस्तेमाल नहीं हो सका।
जानकारी के मुताबिक, विधानसभा व एचईसी सेक्टर इलाके में दिन भर हंगामा होता रहा। दो बार छात्रों पर लाठी चार्ज हुआ, आंसू गैस के गोले दागे गए। कुल मिलाकर विधानसभा के आसपास के इलाके में दिन भर उपद्रव होता रहा। रांची पुलिस, जैप व रैप के जवान तैनात किये गये थे। जवान दिन भर उपद्रवियों से जूझते रहे।
इस बीच, रैफ की तैनाती ना होने के बारे में सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रैफ जवानों की तैनाती की अनुमति दे दी थी। लेकिन, शाम तक सीआरपीएफ की तरफ से रैफ के जवानों को तैनात करने का आदेश जारी नहीं हुआ। इस कारण रैफ के जवान रांची तो पहुंच गये, लेकिन वह कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं थे।
जानकारी के मुताबिक, यह पहला मौका है जब झारखंड पुलिस को इस तरह की परिस्थितियों से जूझना पड़ा है। इससे पहले जब भी रैफ की कंपनियों की मांग होती थी, तब, गृह मंत्रालय द्वारा तैनाती का आदेश दे दिया जाता था। साथ ही, सीआरपीएफ के स्तर से भी आदेश मिल जाता था।


































