हजारीबाग: हजारीबाग जिले में बच्चा चोरी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। हजारीबाग पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पाँच बच्चा चोरों को गिरफ़्तार कर लिया है और उनके चंगुल से एक डेढ़ वर्षीय मासूम को सकुशल बरामद कर लिया है। यह बच्चा 1 जुलाई को महेश सोनी चौक के समीप से रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था, जिसकी तलाश परिजन लगातार कर रहे थे।

घटना का सिलसिलेवार विवरण:

बताया गया है कि 1 जुलाई को, जब परिजन अपने छोटे बच्चे के साथ बाजार आए थे, तभी थोड़ी सी अनदेखी में बच्चा गायब हो गया। परिजनों ने आसपास के इलाकों में कई घंटों तक उसकी तलाश की, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। काफी कोशिशों के बाद भी जब बच्चा नहीं मिला तो 6 जुलाई को परिजनों ने थाने में बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। एसडीपीओ (सदर) अमित आनंद के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध गतिविधियों और कॉल डिटेल्स की गहन जांच की। इसी कड़ी में पुलिस को कुछ ठोस सुराग मिले और फिर योजनाबद्ध तरीके से पुलिस ने छापेमारी कर बच्चा चोर गिरोह के पाँच सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया।

चौंकाने वाला खुलासा: बच्चा बेचने की थी साज़िश

गिरफ़्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान जो जानकारी सामने आई वह बेहद चौंकाने वाली थी। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चे को अपहरण करके ₹1 लाख 80 हज़ार में बेचने की योजना बनाई गई थी। यह सुनियोजित साजिश थी जिसमें मासूम बच्चों को अगवा कर उन्हें दूसरे लोगों को सौंपा जाता था। सौभाग्यवश, सौदा पूरा होने से पहले ही पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर दी और बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया।

पुलिस की भूमिका और अपील

सएडीपीओ अमित आनंद ने जानकारी दी कि समय पर कार्रवाई के कारण एक मासूम की ज़िंदगी को बचाया जा सका और बच्चा अब पूरी तरह सुरक्षित है। उसे मेडिकल जांच के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मानव तस्करी और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अपने बच्चों पर विशेष निगरानी रखें। यदि किसी अनजान व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि समाज में सक्रिय ऐसे आपराधिक गिरोहों के खिलाफ जन-सहयोग बहुत ज़रूरी है।

पुलिस की सतर्कता और तत्परता से एक मासूम की जान तो बच गई, लेकिन यह घटना सोचने पर मजबूर करती है कि किस हद तक मानवता को दरकिनार कर अपराधी गिरोह बच्चों को व्यापार का साधन बना रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस इन आरोपियों के नेटवर्क की गहराई तक पहुँच पाती है या नहीं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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