नई दिल्ली: भारत की उभरती हुई शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने इतिहास रचते हुए ग्रैंडमास्टर (GM) का प्रतिष्ठित खिताब हासिल कर लिया है। वह यह उपलब्धि पाने वाली भारत की चौथी महिला बनी हैं।शतरंज की दुनिया में ग्रैंडमास्टर बनना सबसे ऊंची उपलब्धियों में से एक है, जिसे हासिल करने के लिए खिलाड़ी को तीन GM नॉर्म और 2500 Elo रेटिंग की जरूरत होती है। दिव्या ने यह सभी शर्तें पूरी कर अब अपना नाम इस गौरवशाली सूची में दर्ज करा लिया है।

भारत के पहले ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद थे, जिन्होंने 1988 में यह खिताब जीता था। तब से लेकर अब तक भारत के कुल 88 खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं। दिव्या देशमुख, जो पहले से ही महिला ग्रैंडमास्टर (WGM) थीं, ने हाल ही में कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर यह मुकाम हासिल किया। उनका यह सफर भारत में महिला शतरंज के लिए एक नई प्रेरणा बन गया है।

ग्रैंडमास्टर बनने की प्रक्रिया क्या है?

  • किसी खिलाड़ी को तीन बार ग्रैंडमास्टर स्तर का प्रदर्शन (GM नॉर्म) दिखाना होता है।
  • साथ ही उसकी Elo रेटिंग 2500 या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • ये नॉर्म्स मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में ही माने जाते हैं।
  • दिव्या के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर शतरंज प्रेमियों और खेल जगत में खुशी की लहर है।
  • उनकी सफलता भारतीय महिला शतरंज को नई ऊंचाईयों तक ले जाने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

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