गढ़वा बाईपास पहले से चालू, फिर उद्घाटन क्यों? झामुमो ने उठाए गंभीर सवाल

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गढ़वा: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को झारखंड के गढ़वा में 22 किलोमीटर लंबे बाईपास सड़क का उद्घाटन किया। यह सड़क लगभग 1159 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। इस अवसर पर गडकरी ने रांची, धनबाद, कोलकाता को जोड़ने वाली अन्य सड़क परियोजनाओं पर भी जानकारी साझा की। हालांकि इस उद्घाटन को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह सड़क पहले से चालू है और पिछले एक महीने से टोल वसूली भी हो रही है। ऐसे में अब जाकर उद्घाटन का औचित्य क्या है?

 

टोल वसूली और लागत को लेकर सवाल

भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड जैसे गरीब राज्य में टोल वसूली आम जनता पर अतिरिक्त बोझ है। उन्होंने 22 किमी सड़क के लिए 1159 करोड़ रुपये की लागत को “अत्यधिक” बताते हुए पूछा कि इतनी बड़ी राशि किस आधार पर खर्च की गई और इसमें कितना हिस्सा टैक्स और टोल का है?

उन्होंने राज्य सरकार की कुछ परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि कांटाटोली और सिरम टोली फ्लाईओवर कम लागत में बिना टोल के बने हैं, जबकि केंद्र की परियोजनाओं में लागत लगातार बढ़ रही है। उदाहरण के तौर पर, रांची के रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर की अनुमानित लागत पहले 400 करोड़ थी, जो अब 598 करोड़ हो चुकी है। उन्होंने पूछा कि 198 करोड़ रुपये की यह बढ़ोतरी किस कारण से हुई?

राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन?

भट्टाचार्य ने कहा कि गढ़वा में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में केवल भाजपा नेताओं को मंच पर स्थान दिया गया, जबकि क्षेत्रीय विधायक और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया। इसे उन्होंने राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की योजनाओं को भाजपा के प्रचार मंच में बदलने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पारिवारिक कारणों से इस कार्यक्रम को कुछ दिन आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्रीय मंत्री ने इसे नजर अंदाज किया।

गडकरी पर भरोसा, लेकिन तंत्र पर सवाल

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें नितिन गडकरी पर व्यक्तिगत रूप से भरोसा है और वे एक ईमानदार और संवेदनशील नेता हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि गडकरी को जो जानकारियां दी जा रही हैं, वे अधूरी और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है और यहां की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही योजनाएं बननी चाहिए।

जांच एजेंसी की भूमिका पर सवाल

भट्टाचार्य ने कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री किसी परियोजना की लागत 400 करोड़ बताते हैं, लेकिन दस्तावेज़ों में 598 करोड़ दर्ज हैं, तो यह अंतर कैसे आया? उन्होंने ED (प्रवर्तन निदेशालय) या अन्य जांच एजेंसियों से इस पर संज्ञान लेने की मांग भी की। सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट कहा कि झारखंड की जनता सब देख रही है और उसे केवल विकास नहीं, बल्कि विकास में पारदर्शिता भी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गडकरी से उम्मीद जताई कि वे इन सवालों के जवाब देंगे और झारखंड की वास्तविकता को समझकर फैसले लेंगे।

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