झारखंड की  पूर्व कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद से जुड़े अवैध बालू खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। गुरुवार को ईडी की टीम ने हजारीबाग जिला खनन पदाधिकारी (DMO) अजीत कुमार से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल किए, जो इस पूरे मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।

कौन से दस्तावेज लिए गए?

सूत्रों के अनुसार, जिन दस्तावेजों को ईडी ने डीएमओ से प्राप्त किया है, वे खनन पट्टों, ट्रांसपोर्ट परमिट, रॉयल्टी रसीदों और बालू परिवहन से संबंधित रजिस्टरों से जुड़े हैं। ईडी इन दस्तावेजों के जरिए यह जानने की कोशिश कर रही है कि किन-किन फर्मों या व्यक्तियों को बालू के खनन की अनुमति दी गई थी और किन्होंने अनधिकृत रूप से खनन कर लाभ अर्जित किया।

 पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि इससे पहले ईडी ने हजारीबाग डीएमओ कार्यालय पर सर्वे कर वहां से कुछ दस्तावेज जब्त किए थे, लेकिन कुछ जरूरी कागज़ात उस समय नहीं मिल पाए थे। अब दोबारा दस्तावेज लेने की यह प्रक्रिया उसी जांच का हिस्सा है।

 अंबा प्रसाद और परिवार पर जांच की आंच

ईडी ने 4 जुलाई को अंबा प्रसाद के आवास, उनके भाई के सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) और बालू व्यवसाय से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई ऐसे दस्तावेज सामने आए, जो कथित रूप से अवैध बालू कारोबार में उनके परिवारिक जुड़ाव की ओर संकेत करते हैं।

इन दस्तावेजों के आधार पर ईडी ने अंबा प्रसाद और उनके निकट सहयोगियों के खिलाफ ईसीआईआर (ECIR – Enforcement Case Information Report) दर्ज की है, जिसकी जांच फिलहाल जारी है।

 क्या है मामला?

  • आरोप है कि हजारीबाग और बड़कागांव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन हो रहा था।
  • इस खनन में बगैर वैध लीज और रॉयल्टी भुगतान के बालू का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा था।
  • इस कारोबार से जुड़े लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का भी संदेह जताया जा रहा है।
  • ईडी को शक है कि इस खनन से होने वाली कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध संपत्तियों में बदला गया।

 आगे की जांच

ईडी अब इन दस्तावेजों का गहन विश्लेषण कर रही है। इसके आधार पर संबंधित अधिकारियों, निजी एजेंसियों और राजनीतिक व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है। साथ ही, बैंक खातों की जांच, फर्म रजिस्ट्रेशन डिटेल्स, और आय स्रोतों की वैधता को भी खंगाला जाएगा।

ईडी की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि झारखंड में अवैध खनन और राजनीतिक सांठगांठ का मामला अब केंद्रीय एजेंसियों की सख्त निगरानी में है।

पूर्व विधायक अंबा प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े लोग जांच के घेरे में हैं और आने वाले दिनों में पूछताछ व गिरफ्तारी की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

 

 

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