नई दिल्ली – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए ओपन बुक असेसमेंट (OBA) योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत विद्यार्थी भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों की परीक्षा किताब खोलकर दे सकेंगे।

क्या है ओपन बुक असेसमेंट?

ओपन बुक असेसमेंट में छात्रों को परीक्षा के दौरान पाठ्यपुस्तक और नोट्स देखने की अनुमति होती है। इसका उद्देश्य रटने की आदत को कम करना और छात्रों को समझ पर आधारित सीखने के लिए प्रेरित करना है। इसमें पूछे जाने वाले प्रश्न केवल किताब से उत्तर नकल करने वाले नहीं होंगे, बल्कि ऐसे होंगे जिनका जवाब देने के लिए विश्लेषण, तर्क और सोचने की क्षमता का इस्तेमाल जरूरी होगा।

बोर्ड का मकसद

सीबीएसई के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का तनाव और मानसिक दबाव कम करना है। कई बार छात्र पूरे साल पढ़ाई करने के बावजूद परीक्षा में घबराहट और तनाव के कारण अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। ओबीए में, चूंकि किताब देखने की अनुमति होगी, छात्रों का ध्यान याद करने के बजाय संकल्पनाओं को समझने और उनका इस्तेमाल करने पर रहेगा।

कैसे होगी शुरुआत

सूत्रों के अनुसार, ओपन बुक असेसमेंट को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। कुछ चुनिंदा स्कूलों में इसे आज़माया जाएगा और वहां से मिले फीडबैक के आधार पर पूरे देश में इसे लागू किया जाएगा। बोर्ड इस दौरान शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देगा, ताकि वे इस नई परीक्षा पद्धति के अनुसार छात्रों को तैयार कर सकें।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ओबीए से छात्रों में क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking), समस्या समाधान क्षमता और रचनात्मक सोच (Creative Thinking) को बढ़ावा मिलेगा। यह पद्धति उन्हें केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन में आने वाली वास्तविक परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार करेगी। साथ ही, यह वैश्विक स्तर पर प्रचलित आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के अनुरूप है, जहां रटने की बजाय सोचने और समझने पर जोर दिया जाता है।

छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

कई छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे पढ़ाई का बोझ और तनाव दोनों कम होगा। अभिभावकों का मानना है कि यह बदलाव बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और उन्हें पढ़ाई के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देगा। हालांकि, कुछ का यह भी मानना है कि इस पद्धति को सही तरीके से लागू करना और छात्रों को इसकी तैयारी कराना एक बड़ी चुनौती होगी।

 

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