बच्चों को कुपोषण से बचाने में अब अमेरिका का शोध करेगा मदद, वैज्ञानिकों ने की खोज

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    वैज्ञानिकी खोज: पौधे की नियमित देखभाल करते हैं, ताकि वह जल्द बड़ा हो, हरा-भरा रहे, इसलिए जड़ में खाद-पानी डालना पड़ता है। यह उस की परवाह करना कहा जाता है। यदि आप उसकी परवाह करते हैं तो निश्चित रूप से पौधा हरा रहेगा और अपनी हरियाली से अपनी खुशबू से तथा यदि फलदार है तो जब अपने स्वरूप में आएगा आपको आंतरिक खुशी होगी। पौधे की हरियाली, उसकी खुशबू, उसके फल आपकों उत्साह से भर देगा और उसका और भी ख्याल रखेंगे।

    जड़ में खाद-पानी आपने दिया, इसलिए उन फूलों की खुशबू, उसके फल खाकर निहाल होते रहेंगे, यही हाल गर्भ में आए शिशुओं का होता है.।यदि गर्भकाल से ही ख्याल रखा जाए, उचित परामर्श विशेषज्ञों से लिया जाए तो जन्मकाल से ही शिशु स्वास्थ्य होगा, निरोग रहेगा। आगे चलकर उसका मस्तिष्क विकसित होता रहेगा। लेकिन, यदि गर्भ से ही शिशु का ख्याल नहीं रखा जाएगा तो जन्म लेते ही वह कई रोगों से ग्रस्त हो जाएगा, फिर आप अपनी कमी नहीं बताएंगे बल्कि ईश्वर को कोसते रहेंगे कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ ?

    स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के चेयरमैन तथा पद्मविभूषण से सम्मानित डॉ. पुरुषोत्तम लाल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि गर्भस्थ माताओं के खानपान का पूरा असर बच्चों पर होता है। माता के जीवन स्तर का भी पूरा असर आने वाले बच्चों पर होता है। गलत खानपान, असामान्य स्थानों पर रहकर बीड़ी-सिगरेट, शराब जैसी आदतों का सेवन करना भी गर्भस्थ शिशु के जन्म के बाद असर डालता है। यदि गर्भस्थ माताएं गलती या जानबूझकर गलत दावा का सेवन करती हैं तो इसका भी असर जन्म लेने वाले शिशु पर पड़ता है। कुछ तो जिसे हम जन्मजात कहते हैं वह माता-पिता के माध्यम से ही शिशु पर असर करता है।

    दोस्त नहीं बनाना,एकांगी सोच रखना, दिनभर बैठकर टेलीविजन देखना, ए-आई का लत पड़ जाना तथा सामाजिक संबंधों से अपने को अलग रखना भी कुपोषण के शिकार हो जाते हैं और रही गर्मी में रहने के कारण मस्तिष्क के कमजोर होना तो यह भारतीय परिवेश में आदिकाल से होता आया है, इसलिए जब तक देश की शिक्षा का स्तर नहीं सुधरता देश सुशिक्षित नहीं होता इस तरह की परेशानियों और रोगों से देश पीड़ित होता रहेगा। विश्व के कई संस्थानों द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर शोध किए जाते रहे हैं और परिणाम यह हुआ है बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिला है। अब उस तरह से बच्चे काल के गाल में नहीं समा पाते जो पिछले सदियों होते रहते थे।

    इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के साउथ बेल्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने अध्ययन के बाद कहा कि बच्चों के सीखने की क्षमता अधिक गर्मी से प्रभावित होता है। इस शोधकर्ता ने भारत को शामिल करते हुए कुल 61 देशों के लगभग 14.5 मिलियन छात्रों से संबंधित सात पूर्व प्रकाशित अध्ययनों के डाटा की समीक्षा की है। शोधकर्ता के अध्ययन में बताया गया हैं कि लंबे समय तक गर्मी के संपर्क मे रहने से बच्चों के संज्ञानात्मक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। शोधकर्ता लव वर्ष्णेय ने कहा है कि ज्यादा तापमान से दिमाग और खून के बीच अवरोध टूट जाता है और दिमाग में अवांछनीय प्रोटीन और आयन जमा होने लगते हैं, लिहाजा दिमाग में सूजन और उनके सामान्य कार्यों में बाधा आने लगती है और मस्तिष्क कोशिकाएं मरने लगती है।

    इतना ही नहीं शरीर को नियंत्रित करने वाला दिमागी हिस्सा भी प्रभावित होता है जो पसीने के माध्यम से शरीर का तापमान नियंत्रित करता है। भारत का तापमान जो लगभग अनियंत्रित है और अत्यधिक तापमान वाला देश है उसे कैसे नियंत्रित किया जाए ?उपाय के रूप जो परिवार आर्थिक रूप से कुछ संपन्न है वह तो अपने बच्चों को विदेश भेज देते हैं, लेकिन भारत की झोपड़ियों में रहने वाले अथवा सुदूर गांव रहने वाले क्या कर सकते हैं। सच तो यह है कि इस प्रकार के परिवार के गरीब बच्चे अपने देश में अशिक्षित रह जाते हैं और उनकी आबादी बढ़ती जाती है और उनका पूरा परिवार गरीबी रेखा के नीचे रह जाता है।

    यह अस्सी करोड़ लोगों की सच्चाई होती है। जब तक देश का प्रत्येक वर्ग शिक्षित नहीं होगा यह देश गरीबी से जूझता हुआ पिछड़ता ही जाएगा। विश्व के परिवेश अथवा भारत के भी शोधकर्ता इस बात को जानते हैं, लेकिन उनका काम यहीं खत्म हो जाता है। अब सरकार का ही यह कर्तव्य होता है कि ऐसे समाज को किस तरह संपन्न कराया जाए ताकि समाज का हर व्यक्ति अपने दो जून का तथा अपने परिवार और बच्चों को स्वास्थ्य जीवन और शिक्षित कराने में सक्षम हो सके। जो स्थिती आज देश की बनी हुई है उसमें तो ऐसा लगता है कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षित समाज का निर्माण करने में अभी वर्षों लग सकता है। ऐसा इसलिए कि जनता सरकार की उम्मीद पर ही और भरोसे पर निर्भर रहतीं है; क्योंकि उसका विश्वास होता है कि सरकार ही इस गरीबी, अशिक्षा को दूर कर सकती है।

     

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