CUJ में छात्रों की आवाज़ दबाने का आरोप, 10 छात्रों पर पंजीकरण रोक

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रांची (झारखंड) : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में एक बार फिर छात्र-प्रशासन टकराव सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 10 छात्रों के आगामी सेमेस्टर पंजीकरण पर रोक लगाए जाने के बाद कैंपस में रोष का माहौल है। छात्रों ने इसे “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला” और “कुलपति की तानाशाही नीति” करार दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन 10 छात्रों पर विश्वविद्यालय में “भ्रष्टाचार, अनियमितता और छात्र विरोधी नीतियों” के विरुद्ध आवाज़ उठाने का आरोप है। छात्रों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह निराधार, भ्रामक और मनमानी है, जिसका उद्देश्य उनके आंदोलन को कुचलना और विश्वविद्यालय में तानाशाही स्थापित करना है। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनका समर्थ पोर्टल बंद कर दिया है और उन्हें करियर बर्बाद करने की धमकियाँ दी जा रही हैं। इसे छात्रों ने लोकतंत्र और शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला बताया है।

 

आर्थिक बोझ भी बढ़ा

विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बस शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहाँ बस शुल्क ₹6600 था, वहीं अब इसे ₹8000 कर दिया गया है। इसके साथ ही नए छात्रों के लिए भी अन्य शुल्कों में बढ़ोतरी की गई है, जिससे छात्र और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

छात्रों की प्रमुख माँगें:

1. 10 छात्रों के पंजीकरण पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए।

2. सभी छात्रों के समर्थ पोर्टल को पुनः सक्रिय किया जाए।

3. प्रशासन के फैसलों की निष्पक्ष जांच हो।

4. लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने की नीति पर तुरंत रोक लगे।

छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक लड़ाई नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लड़ाई है, जिसमें वे किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेंगे।

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