राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मांडर के कुंबा टोली एवं बांध टोली के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सात पड़हा जतरा में हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह आयोजन पुरखों की विरासत को बचाने और बढ़ाने का संकल्प है।
*आदिवासी समाज की भूमिका:*
– *जमीन और जंगल के संरक्षक*: आदिवासी समाज हमेशा से ही जमीन और जंगल के संरक्षक की भूमिका अदा करते रहा है। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अगर आदिवासी समाज है तो जमीन और जंगल भी बचेगा।
– *पड़हा व्यवस्था का महत्व*: मंत्री ने कहा कि रोहतासगढ़ से आए पूर्वजों ने जंगल-जमीन को पहले रहने लायक बनाया, फिर समाज के संचालन के लिए पड़हा व्यवस्था की शुरुआत की। इस व्यवस्था में सभी के हित की बात थी और सभी के लिए न्याय की व्यवस्था रही।
*शिक्षा की आवश्यकता:*
– *शिक्षा से ही बदलाव संभव*: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आज जरूरत आदिवासी समाज के बीच शिक्षा को प्राथमिकता देने की है। शिक्षित समाज से ही बदलाव संभव है।
– *षड्यंत्रकारियों से बचाव*: अगर शिक्षा से दूर रहे तो षड्यंत्रकारी हमें जाति और धर्म में उलझा कर अपना राजनीतिक मकसद साधते रहेंगे।
कार्यक्रम में अध्यक्ष लालू तिर्की, महावीर उरांव, सोनू उरांव, प्रदीप उरांव, उमेश उरांव, दिपुल टोप्पो, संजय तिर्की, पुलिस तिर्की, बंदे उरांव, अनिता तिर्की, कुंदन तिर्की मुख्य रूप से शामिल हुए।




























