झारखंड: हाईकोर्ट ने राज्य के जेल में डॉक्टर की कमी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में बदलते हुए मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है। दरअसल, एक क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह बात आई थी कि राज्य के जेल में डॉक्टर के 43 स्वीकृत पद हैं, लेकिन उन स्वीकृति पदों में से मात्र एक पद HJ ही डॉक्टर कार्यरत हैं। बाकी डॉक्टर के 42 पद खाली पड़े हैं। साथ ही, राज्य के जेल में मेडिकल सुविधाओं के आधारभूत संरचना में भी कमी है।
यहां उल्लेखनीय है कि इससे संबंधित क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान प्रार्थी ने हस्तक्षेप याचिका (IA) दाखिल कर अपना किडनी खराब होने का हवाला देते हुए जमानत देने का आग्रह किया था। मामले में सरकार का जब तक जवाब आता तब तक प्रार्थी की मौत हो गई। हालांकि, प्रार्थी की मौत हो जाने पर उनके परिजनों ने मुआवजा का आग्रह भी कोर्ट से किया था। जिस पर कोर्ट ने उन्हें मुआवजा के संबंध में याचिका दायर करने की छूट प्रदान की है।
































