झारखंड: झारखंड की समृद्ध और रणनीतिक महत्वपूर्ण खनिज संपदा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से लंदन के बकिंघम गेट में शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक के दौरान, झारखंड में उपलब्ध लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, टाइटेनियम, वैनाडियम, पोटाश, तांबा और सोना जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक वैश्विक उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों ने राज्य की भूवैज्ञानिक संभावनाओं, चल रही खनिज अन्वेषण गतिविधियों और सतत एवं जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देने के लिए किए गए नीतिगत और विनियामक सुधारों पर प्रस्तुतीकरण दिया।
कोडरमा-गिरिडीह अभ्रक क्षेत्र, पलामू ग्रेफाइट ब्लॉक्स, सिंहभूम खनिज पट्टी तथा कोयला और लौह-अयस्क समृद्ध क्षेत्रों में निहित महत्वपूर्ण खनिज संभावनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
चर्चा के दौरान, भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को समर्थन देने और सुरक्षित तथा विविधीकृत वैश्विक आपूर्ति सुनिश्चित करने में झारखंड की रणनीतिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
अन्वेषण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान, बेनिफिशिएशन और मूल्य संवर्धन के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रतिभागियों ने पारदर्शिता, व्यापार करने में सुगमता और महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप झारखंड के प्रगतिशील रुख की सराहना की। बैठक का समापन महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में झारखंड और वैश्विक साझेदारों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वंदना डाडेल, निदेशक खान राहुल कुमार सिन्हा, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुकेश, बर्मिंघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पॉल एंडरसन, क्रिटिकल मिनरल्स एसोसिएशन यूके के संस्थापक डॉ जेफ टाउनसेंड और एसआरके कंसल्टिंग यूके के निदेशक रिचर्ड ओल्डकॉर्न सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ व हितधारक मौजूद थे।






























