झारखंड: झारखंड में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए गठित प्रमुख संवैधानिक संस्था झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग (JSHRC) 2023 यानी करीब 36 महीनों से निष्क्रिय पड़ी हुई है। आयोग में न तो अध्यक्ष है और न ही सदस्य सचिव। आयोग के नाम पर केवल कुछ कर्मचारी ही कार्यरत हैं। जिस वजह से वर्तमान में आयोग के पास करीब 2,944 मामले लंबित पड़े हुए हैं।
वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं पीड़ित
बता दें कि राज्यभर से पुलिस अत्याचार, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन, महिलाओं और बच्चों के साथ अन्याय सहित मानवाधिकार हनन से जुड़े अन्य मामलों की शिकायतें लगातार आयोग तक पहुंच रही हैं।
आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों ना होने के कारण न तो नियमित सुनवाई हो रही है और न ही सरकार को अनुशंसाएं भेजी जा रही हैं। अधिकांश शिकायतें केवल पंजीकृत होकर फाइलों में बंद हैं, जिससे पीड़ित वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे मानवाधिकार संरक्षण की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कब-कब कौन-कौन रहे अध्यक्ष
- 2011 में आयोग का गठन, पहले अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति नारायण राय, कार्यकाल पांच साल।
- इसके बाद मणिपुर के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.आर. प्रसाद नौ माह के लिए अध्यक्ष बने।
- फिर राज्यपाल के प्रधान सचिव रहे एस.के. सतपाठी को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया, कार्यकाल 5 मार्च 2023 तक रहा।
- 2023 के बाद झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग बिना अध्यक्ष और सदस्य सचिव के काम कर रहा है।
































