16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने स्पष्ट किया है कि यदि झारखंड में इस वर्ष स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न हो जाते हैं, तो राज्य को वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की दोनों वर्षों की बकाया ग्रांट मिल जाएगी। वे शुक्रवार को रांची में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
*चुनाव से जुड़ी शर्त*
पनगढ़िया ने बताया कि 15वें वित्त आयोग ने स्थानीय निकायों को अनुदान (ग्रांट) देने के लिए चुनाव को अनिवार्य शर्त के रूप में रखा था। चुनाव न होने के कारण झारखंड को मिलने वाला पैसा अटका हुआ है। लेकिन यदि इस साल चुनाव पूरे हो जाते हैं, तो दो साल का फंड एक साथ जारी हो सकता है।
*वित्त आयोग की सिफारिशें*
पनगढ़िया ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त आयोग सिर्फ सिफारिश करता है, जबकि अनुदान राशि केंद्र सरकार के बजट से आती है। उन्होंने पुराने वित्त आयोगों का हवाला देते हुए बताया कि 13वें वित्त आयोग ने राज्यों को 32.02% केंद्रीय करों में हिस्सेदारी देने की सिफारिश की थी, जबकि 15वें वित्त आयोग ने यह भागीदारी बढ़ाकर 41% कर दी।
*केंद्रीय करों में हिस्सेदारी की मांग*
वर्तमान में झारखंड सरकार केंद्रीय करों में 50% हिस्सेदारी की मांग कर रही है। पनगढ़िया ने कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी तय करने के लिए वेटेज (वजन) आधारित प्रणाली अपनाने की जरूरत है, जिससे छोटे और पिछड़े राज्यों को उचित न्याय मिल सके।
*वित्त आयोग का उद्देश्य*
पनगढ़िया ने कहा कि वित्त आयोग का उद्देश्य केवल राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय संतुलन बनाना ही नहीं, बल्कि नीतिगत सुधारों को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि झारखंड सरकार जल्द ही स्थानीय निकाय चुनाव कराकर बकाया ग्रांट प्राप्त करेगी।

























