भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम (सीजफायर) को लेकर एक बार फिर अमेरिका और भारत के बयानों में टकराव देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने दावा किया है कि इस सीजफायर में उनकी अहम भूमिका रही है, जबकि भारत सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
23 मई को ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में दायर एक दस्तावेज में कहा कि भारत-पाक के बीच हुए सीजफायर के पीछे अमेरिका की कूटनीति और टैरिफ से जुड़ी रणनीति काम कर रही थी। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने अदालत को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने टैरिफ अधिकारों का इस्तेमाल कर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराया और युद्धविराम की स्थिति बनाई। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि टैरिफ नियमों का पालन नहीं हुआ, तो यह शांति खतरे में पड़ सकती है।
इस बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है। भारत सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ कहा कि यह फैसला पूरी तरह द्विपक्षीय था और दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच आपसी बातचीत के बाद लिया गया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस फैसले में किसी तीसरे पक्ष, खासकर अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्री ने संसदीय समिति में भी इस बात को दोहराया।

























