झारखंड शराब व्यापारी संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि शराब दुकानों की लॉटरी में झारखंड के निवासियों को प्राथमिकता दी जाए। संघ ने नई उत्पाद नीति का स्वागत करते हुए कुछ सुझाव भी दिए हैं।
*निजी हाथों में लौट रही शराब बिक्री*
संघ के अनुसार, तीन वर्षों बाद खुदरा शराब बिक्री निजी हाथों में लौट रही है और इस बार सरकार ने 4000 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है, जो पिछले वर्ष से करीब 1300 करोड़ अधिक है। व्यापारियों का कहना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से खुदरा दुकानदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
*स्थानीय व्यापारियों की चिंता*
संघ ने आशंका जताई कि बाहर के व्यापारी बड़ी संख्या में लॉटरी में हिस्सा ले सकते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार प्रभावित होगा। उन्होंने “एक व्यक्ति, एक दुकान” का सिद्धांत लागू करने और राज्यवासियों को प्राथमिकता देने की मांग की।
*सरकार को राजस्व मिलने की उम्मीद*
नई नीति से सरकार को एडवांस में लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। संघ का मानना है कि यदि स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाए, तो इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सरकार को भी अधिक राजस्व मिलेगा।
*संघ की मांगें*
संघ ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से अनुरोध किया है कि वह स्थानीय निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शराब दुकानों की लॉटरी में उन्हें प्राथमिकता दे। संघ का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य के विकास में भी योगदान होगा।





























