झारखंड सरकार ने रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार को विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि डॉ. राजकुमार ने अपने कार्यकाल में कई वित्तीय अनियमितताएं की हैं, जिनमें रिम्स के लिए मिले 691 करोड़ रुपये वापस करना, वित्तीय कुप्रबंधन, और बिना लिखित परीक्षा के एमएचए कोर्स में अपने बेटे सहित अन्य के एडमिशन का मामला शामिल है।
*आरोपों की सूची*
सरकार की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि डॉ. राजकुमार ने एमएचए कोर्स में लिखित परीक्षा के बदले वाक इन इंटरव्यू के आधार पर एडमिशन लिया, जिसमें उनके बेटे ऋषभ कुमार का भी एडमिशन हुआ। इसके अलावा, कोर्स में किसी तरह का वजीफा देने का नियम नहीं था, लेकिन गवर्निंग बॉडी की 58वीं बैठक में 30 हजार रुपये प्रति माह वजीफा देने का प्रस्ताव पेश किया गया।
*नियमों का उल्लंघन*
सरकार ने आरोप लगाया है कि डॉ. राजकुमार ने रिम्स नियमावली का उल्लंघन करते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर जारी किया, बिना प्रशासनिक स्वीकृति के सामग्रियों की खरीद के लिए टेंडर प्रकाशित किया, और गवर्निंग बॉडी की बैठक में पारित किये गये प्रस्ताव को दो सप्ताह के अंदर सरकार को नहीं भेजा।
*वित्तीय कुप्रबंधन*
सरकार ने आरोप लगाया है कि डॉ. राजकुमार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वास्थ्य सेवाओं के कुशल प्रबंधन के लिए दिये गये पैसों को खर्च नहीं किया और 691 करोड़ रुपये सरकार को वापस कर दिया। इसके अलावा, रिम्स को अनुदान के रूप में 300 करोड़ रुपये दिये गये थे, लेकिन इस राशि का भी पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया।
अब देखना यह है कि डॉ. राजकुमार इस कारण बताओ नोटिस का क्या जवाब देते हैं और सरकार उनकी अनियमितताओं के आरोपों पर क्या कार्रवाई करती है।





























