एचईसी प्रबंधन का बड़ा फैसला: क्वार्टर सरेंडर की प्रक्रिया फिर शुरू

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एचईसी प्रबंधन ने आवंटित क्वार्टरों को सरेंडर करने की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू कर दी है, जो पिछले कई महीनों से स्थगित थी। इस प्रक्रिया के तहत, जिन कर्मचारियों ने एचईसी से इस्तीफा देकर अन्य कंपनियों में नौकरी ग्रहण की या जिन्होंने अपने मकान बना लिए हैं, वे अपने क्वार्टर सरेंडर कर सकते हैं। इससे पहले, प्रबंधन ने इन कर्मचारियों के क्वार्टर सरेंडर करने की प्रक्रिया में आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण उन्हें प्रबंधन द्वारा निर्धारित मार्केट रेट पर किराया चुकाना पड़ रहा था, जो सामान्य दर से दो से तीन गुना अधिक था।

 

 

 

क्वार्टर सरेंडर करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के बाद, पिछले दो दिनों में 30 से अधिक कर्मचारियों ने अपने क्वार्टर सरेंडर किये हैं। हटिया कामगार यूनियन के उपाध्यक्ष लालदेव ने प्रबंधन के निर्णय का स्वागत किया है।

 

 

 

 

 

लालदेव ने बताया कि एचईसी के आवासों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। रखरखाव की कमी के कारण क्वार्टर जर्जर होते जा रहे हैं और जिन आवासों का प्रबंधन आवंटन करता है, उनमें रहने वाले कर्मियों को भारी खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में कर्मी आवास लेने से हिचकिचा रहे हैं।

 

 

इसके अलावा, सात सौ से अधिक क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है और इस बारे में प्रशासन और प्रबंधन को कोई जानकारी नहीं है। यदि प्रबंधन खाली पड़े आवासों को दीर्घकालिक लीज पर आवंटित करे, तो एचईसी को करोड़ों रुपये की आय हो सकती है।

 

 

 

 

एचईसी प्रबंधन के इस निर्णय से कर्मचारियों को राहत मिलेगी और वे अपने क्वार्टर सरेंडर कर सकेंगे। इससे एचईसी को भी फायदा होगा, क्योंकि खाली पड़े आवासों को दीर्घकालिक लीज पर आवंटित करने से करोड़ों रुपये की आय हो सकती है।

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