अब सचिवालय सहायक एवं निजी सचिवों से लाखों की वसूली संभव नहीं

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सचिवालय सहायक व निजी सचिव, अतिरिक्त भुगतान को वापस लेने के झारखंड सरकार के फैसले को लेकर आक्रोशित हैं। वह आंदोलन की धमकी दिए है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से यह स्पष्ट पता चला है कि सरकार को कुछ भी नहीं मिलने वाला क्योंकि सचिवालय सहायकों व निजी सचिवों को जो भुगतान किया गया है, उसमें उनकी कोई गलती नहीं है।

 

 

राज्य सरकार ने पिछले दिनों सचिवालय सहायकों और निजी सचिवों को किये गये अतिरिक्त भुगतान की वसूली फैसला किया था उसके साथ ही वसूली के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की थी।

 

 

सरकार के इस फैसले से सचिवालय सहायकों में नाराजगी पैदा हुई, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में सचिवालय सहायकों और निजी सचिवों से वसूली की संभावना नहीं है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नियोक्ता की ओर से गलत गणना या किसी नियम की गलत व्याख्या के आलोक में कर्मचारियों को किये गये अतिरिक्त भुगतान की वसूली नहीं की जा सकती है।

 

किसी कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी या गलतबयानी कर ली गयी अतिरिक्त राशि की ही वसूली की जा सकती है।

 

 

न्यायाधीश पी.एस नरसिम्हा और न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने ओड़िशा सिविल कोर्ट में कार्यरत निजी सहायकों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ( जोगेश्वर साहू बना जिला जज कोर्ट ) में कहा गया था कि सरकार ने उनकी सेवानिवृत के तीन साल और उन्हें किये गये भुगतान के छह साल बाद बीस से चालीस हजार रुपये की वसूली का आदेश दिया था।

 

कर्मचारियों ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी।

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