अनुसूचित क्षेत्रों में शराब दुकानें नहीं चाहिए: आदिवासी संगठनों का जोरदार विरोध

0
130

झारखंड सरकार के अनुसूचित क्षेत्रों में शराब दुकानें खोलने के फैसले के खिलाफ आदिवासी संगठनों ने जोरदार विरोध किया है। शनिवार को पूर्व मंत्री देव कुमार धान के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपकर इस प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की।

 

 

 

*संविधान की पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन*

 

प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित क्षेत्रों में शराब की बिक्री आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक ढांचे पर हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती है, तो आदिवासी समाज बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होगा।

 

 

 

*आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षण की मांग*

 

संगठनों ने यह भी मांग की कि अगर सरकार शराब दुकानें खोलना ही चाहती है, तो शहरी इलाकों में खुलने वाली दुकानों में आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इससे आदिवासी समुदाय को भी इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

 

 

 

*बालू के अवैध कारोबार पर चिंता*

 

प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में बालू के अवैध कारोबार और उससे जुड़े भ्रष्टाचार पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक हाईवा बालू की कीमत करीब 46,000 रुपये हो गई है, जिसमें से करीब 26,000 रुपये की रिश्वत पुलिस और माफिया को देनी पड़ती है। इससे गांवों में निर्माण कार्य रुक गए हैं।

 

 

 

*ग्राम सभाओं को पूर्ण अधिकार देने की मांग*

 

प्रतिनिधियों ने सभी लघु खनिज जैसे बालू, गिट्टी, मिट्टी और मोरम पर ग्राम सभाओं को पूर्ण अधिकार देने की मांग की। इससे स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय समुदाय का नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

 

 

 

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो आदिवासी समाज को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इस अवसर पर देव कुमार धान के साथ प्रेमशाही मुंडा, फुलचंद तिर्की, अभय भुटकुंवर और रमेश उरांव सहित कई अन्य नेता भी उपस्थित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here