चतरा: एक तरफ जहां देश में धर्म और जाति के कारण युद्धों की घटनाएं सामने आ रही है वहां झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड स्थित हेढूंढूं गांव में एक हिंदू परिवार काफी सामाजिक, सौहार्द और धार्मिक एकता की मिसाल बना हुआ है। जिस गांव में एक भी प्रमुख मुस्लिम परिवार नहीं रहता वहां पिछले 71 साल से मुहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ माना रहा है।
बिना किसी मुस्लिम आबादी के मना रही मुहर्रम
हेडडम गांव का यह परिवार न केवल मुहर्रम मनाता है बल्कि रमजान के महीने में रोज़ा, ईद, बकरीद जैसे सारे मुस्लिम पर्व मनाता है। पूरे गांव में एक भी मुसलमान न होने पर भी हर मुहर्रम पर ताजिया बनाते है और बड़े ही जोश से जुलूस निकलते है।
गांव के अन्य लोग भी आयोजन में शामिल होते है और काफी उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते है। यह गांव एवं यह परिवार आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का बेहद खास उदाहरण है।
मेला का प्रबंध
हर वर्ष मुहर्रम की दसवीं तारीख को ताजिया के साथ जुलूस निकाल कर करते है जो गांव से होते हुए कल्याणपुर बाजारटांड़ तक पहुंचती है। साथ ही बड़े भव्य मेले के आयोजन होता है जिसमें दूर के ग्रामीण पहुंचते है और यह मेल न सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक रंग में भी रंगा रहता है। गांव के युवा “पैकाह” बनाते है, कमर में घुंघरू बांधकर दौड़ लगाते है और लाठी खेल जैसे करतब भी दिखाते है। यह दृश्य सांप्रदायिक सौहार्द एक अद्भुत दृश्य पेश करती है।
यह गांव आम तौर पर यह संदेश दे रही है कि विविधता में ही हमारी असली शक्ति और पहचान है।






























