झारखंड: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी, जिनके पास वकील और न्यायिक सेवा का संयुक्त 7 वर्षों का अनुभव है वे अब प्रत्यक्ष भर्ती के तहत जिला जज बनने के लिए पात्र होंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि योग्यता आवेदन की तारीख पर देखी जाएगी न कि नियुक्ति की तारीख पर। साथ ही न्यायिक सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 35 वर्ष निर्धारित की गई है ताकि सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो। कोर्ट ने Dheeraj Mor केस में दिए गए पुराने फैसले को अमान्य कर दिया जिसमें इन-सरविस उम्मीदवारों को बार कोटे से भर्ती के लिए अयोग्य ठहराया गया था। यह नया निर्णय आज से लागू होगा और पहले हो चुकी भर्तियों को प्रभावित नहीं करेगा।
ये रही मुख्य बिंदु :
- 7 साल का संयुक्त अनुभव (वकील और न्यायिक अधिकारी के रूप में) जरूरी।
- न्यूनतम आयु 35 वर्ष – इन-सरविस उम्मीदवारों के लिए।
- निरंतर अनुभव जरूरी – बीच में लंबे ब्रेक मान्य नहीं।
- कोई कोटा नहीं – बार उम्मीदवारों के लिए अलग 25% आरक्षण का अनुरोध खारिज।
- राज्य सरकारें और हाईकोर्ट तीन महीनों में नियमों में बदलाव करेंगी।
यह फैसला CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने सुनाया। निर्णय में कहा गया कि न्यायिक अधिकारियों का अनुभव भी वकीलों के बराबर, बल्कि कई मामलों में अधिक मूल्यवान माना जा सकता है।



























