धुर्वा डैम भूमि घोटाला मामले में जांच करेगी ACB

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रांची: धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में हुए अवैध अतिक्रमण और जमीन की हेराफेरी मामले में अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले को टेकओवर कर लिया है।

इसके बाद, एजेंसी ने नगड़ी थाना में दर्ज केस संख्या 21/2026 में अनुसंधान शुरू कर दिया है। बता दें कि रिम्स जमीन अतिक्रमण मामले की जांच के बाद एसीबी के पास यह दूसरा सबसे बड़ा भूमि घोटाला केस है, जिसे वह हाईकोर्ट के निर्देश पर सुलझाएगी।

HC के निर्देश पर नगड़ी थाना में मामला दर्ज

उल्लेखनीय है कि धुर्वा डैम की जमीन को बचाने के लिए हाईकोर्ट ने पहले ही स्पष्ट आदेश दिए थे, जिसके बाद रांची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर नगड़ी थाने में मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने न सिर्फ अतिक्रमणकारियों पर, बल्कि उन सरकारी अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने अवैध तरीके से जमीन को ट्रांसफर किया। सरकारी जमीन की जमाबंदी की और वर्जित क्षेत्र होने के बावजूद लगान रसीदें जारी कीं। अदालत का स्पष्ट निर्देश है कि ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

आखिर क्या है पूरा विवाद?

यह मामला तब सामने आया, जब धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में जमीन खरीदने को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि उन्होंने जमीन वैध तरीके से खरीदी है और वहां घर भी बना लिया है।

दूसरी ओर, जब नगड़ी सीओ ने अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया, तो मामला पेचीदा हो गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में यह साफ कर दिया कि संबंधित जमीन धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया का हिस्सा है। इस भूमि का अधिग्रहण सरकार द्वारा बहुत पहले ही किया जा चुका है।

सरकारी अधिग्रहण वाली जमीन की बिक्री किसी भी निजी व्यक्ति को करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।

ACB इन बिंदुओं पर करेगी जांच:

  • किन दस्तावेजों के आधार पर कैचमेंट एरिया की जमीन की रजिस्ट्री हुई?
  • राजस्व विभाग के किन कर्मियों ने नियमों को ताक पर रखकर लगान रसीदें काटीं?
  • डैम की सुरक्षा और जलस्तर को प्रभावित करने वाले अवैध निर्माणों की पहचान

 

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