नेपाल के हंगामा में 27 लोग हुए गिरफ्तार

0
168

नेपाल की सेना ने काठमांडू की सड़कों पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। देश पिछले कई दशकों में सबसे बड़े असंतोष और अशांति के दौर से गुज़र रहा है। सोमवार को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। बड़े पैमाने पर सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने नेताओं के घरों पर हमला किया, सरकारी इमारतों को आग लगा दी और संसद भवन तक जला दिया। बाद में प्रधानमंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया।

सोमवार से अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन विरोध की अगुवाई कर रहे ‘जेन ज़ी’ समूहों ने हिंसा से ख़ुद को अलग करते हुए कहा है कि ‘आंदोलन को मौक़ापरस्त तत्वों ने हाईजैक’ कर लिया है। बुधवार को काठमांडू एयरपोर्ट फिर से खुल गया। शहर में कर्फ़्यू की वजह से माहौल पहले के मुकाबले शांत दिखा। हालांकि कई इमारतों से अब भी धुआं उठ रहा था। सेना हालात को संभालने की कोशिश कर रही है और उसने ‘जेन ज़ी’ प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए बुलाया है।

देशभर में गुरुवार सुबह तक कर्फ़्यू लागू है। सेना ने चेतावनी दी है कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल किसी को बख़्शा नहीं जाएगा। अब तक हिंसा और लूटपाट के आरोप में 27 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और 31 हथियार ज़ब्त किए गए हैं। पूरे काठमांडू में चेक पॉइंट बनाए गए हैं जहाँ सेना वाहन रोककर चेकिंग कर रही है। सैनिक लाउडस्पीकर से लगातार एलान कर रहे हैं, “बिना वजह बाहर न निकलें।”

फिर भी कुछ युवा सड़क पर दिखे, जो मास्क और दस्ताने पहनकर कूड़े के बैग उठाए हुए थे और प्रदर्शन के बाद सड़क पर बिखरे मलबे को साफ़ कर रहे थे। इन्हीं युवाओं में 14 वर्षीय क्षांग लामा भी शामिल हैं जिन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन नेपाल में बदलाव की उम्मीद ज़ाहिर की। वो कहती हैं, “भ्रष्टाचार नेपाल में बहुत लंबे समय से है। अब वक़्त आ गया है कि देश बदले। मैं सचमुच चाहती हूं कि इससे हमारे देश में कुछ सकारात्मक हो।”

मंगलवार के प्रदर्शन में भाग लेने वाले 24 साल के पराश प्रताप हमाल के मुताबिक़, नेपाल को “स्वतंत्र राजनीतिक हस्तियों” की ज़रूरत है। उन्होंने काठमांडू के मेयर बालेन शाह का उदाहरण दिया और कहा कि वो देश के लिए अच्छे नेता साबित हो सकते हैं। पूर्वी नेपाल में रहने वाले 36 वर्षीय राकेश निरौला कहते हैं, “इस क्रांति के बाद लोगों में उम्मीद पैदा हो गई है। हमें बेहतर शासन की उम्मीद है। हमें लगता है कि यह नेताओं के लिए सबक़ है कि वे ख़ुद को सुधारें ताकि देश का भविष्य उज्ज्वल हो।”

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here