पश्चिम बंगाल में वक्फ एक्ट के विरोध में भड़की हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। मुर्शिदाबाद में जुम्मे की नमाज के बाद हुए प्रदर्शन में हिंसा भड़क उठी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और कई वाहन आग के हवाले कर दिए गए। इस घटना के बाद ममता बनर्जी सरकार की प्रतिक्रिया ने विवाद खड़ा कर दिया है।
*ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल*
ममता बनर्जी पर आरोप है कि वे मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति में फंस चुकी हैं और हिंसा के बाद एक पक्ष का समर्थन कर रही हैं। इमामों के सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल उठता है कि क्या एक मुख्यमंत्री को दंगा होने के बाद किसी एक पक्ष का समर्थन करना चाहिए?
*विरोध और आरोप*
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वे वोटबैंक की राजनीति और तुष्टिकरण में लिप्त हैं। उन्होंने ममता के इस्तीफे की मांग भी की।
*हिंसा के प्रभाव*
मुर्शिदाबाद में हिंसा ने न सिर्फ हिंदुओं की जान ली, बल्कि सैकड़ों परिवारों के घर उजाड़ दिए। हिंसा के बाद प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और धारा 163 लागू कर दी, जिसके तहत चार या अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने पर पाबंदी है।
*सवाल और संदेश*
अब सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी की इस भूमिका से करोड़ों लोग हर्ट हुए हैं? क्या वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने की कोशिश कर रही हैं? जनता देख रही है कि ममता बनर्जी के इस कदम से उनकी छवि को कितना नुकसान पहुंचा है ।
























