सरला बिरला विवि के आइडियाथॉन में A-Squared की अहम भागीदारी, 77 टीमों ने पेश किए आइडिया

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रांची: रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय में इंस्टिट्यूट इनोवेशन काउंसलिंग के तत्त्वधान में शुक्रवार (18 सितंबर) को ‘आइडियाथॉन 2026’ का आयोजन किया गया, जिसमें जीडी बिरला सभागार में आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘कन्वर्टिंग आइडियाज इंटू इंपैक्ट’ रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सामाजिक एवं श्रमकालीन चुनौतियों के समाधान के लिए अपने नवाचार पूर्ण विचार प्रस्तुत किए। आइडियाथॉन में कुल 77 टीमों ने पंजीकरण भी कराया। छह समांतर क्षेत्रों में सामाजिक मुद्दे, पर्यावरण एवं स्थिरता, प्रौद्योगिक एवं शिक्षा तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण जैसे विषयों पर विद्यार्थियों ने अपने विचार को साझा भी किया। इस कार्यक्रम में एसक्वायर की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही, जिसमें ‘ए स्क्वायड’ संस्थान की ओर से आइडियाथॉन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टीमों के लिए पुरस्कार राशि का प्रायोजन किया गया और प्रथम पुरस्कार के रूप में पाँच हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार के लिए तीन हजार रुपये एवं तृतीय पुरस्कार के लिए दो हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई। विजेताओं की घोषणा 23 सितंबर को कर दी जाएगी।

‘ए स्क्वायड’ के निदेशक प्रवीण शर्मा ने कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ अपने उद्यमशीलता और व्यवसायिक अनुभव को भी साझा किया, जिसमें उन्होंने नवचार विचारों को व्यावहारिक रूप देने एवं उन्हें प्रभावी समाधान में बदलने का महत्वपूर्ण सीख बताई है। इस कार्यक्रम में ‘ए स्क्वायड’ की ओर से अमित इकलव्य और वर्षा अग्रवाल भी उपस्थित रहे, जिसमें ‘ ए स्क्वायड’ की सहभागिता ने विद्यार्थियों के बीच नवचार, उद्यमिता एवं व्यावहारिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस पहल को सहयोग प्रदान किया है।

साथ ही, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सह निदेशक प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉक्टर प्रदीप कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा है कि केवल ज्ञान अर्पित करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसका उपयोग करना वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में होना चाहिए। महानिदेशक प्रोफेसर गोपाल पाठक एवं कुलपति प्रोफेसर सी. जगनाथन ने भी विद्यार्थियों को नवचार एवं उद्यमिता के अवसरों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच एवं नवचार की संस्कृति को बढ़ावा देना था।

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