देश विदेश: प्रधानमंत्री मोदी ने आज मंगलवार को सेवा तीर्थ में भारतीय प्रशासनिक सेवा 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने युवा सिविल सेवकों से अपील की कि वे मज़बूत इरादों और नागरिक केंद्रित शासन के लक्ष्य के साथ राष्ट्र-निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें।
बता दें कि, इन सिविल सेवकों को विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। युवा अधिकारियों ने पीएम मोदी के साथ फील्ड प्रशिक्षण और मंत्रालयों में अपनी तैनाती के दौरान के अनुभवों को शेयर किया।
अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आप दो वर्षों के प्रशासनिक प्रशिक्षण के बाद अब एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं, जहां आपके निर्णय न केवल उनके अपने करियर को वरन् करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी आकार देने जा रहे हैं।
पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि लोक सेवा की असली परीक्षा वास्तव में ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ निपटने से शुरू होती है। पीएम ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे हमेशा याद रखें कि प्रशासन से संबंधित प्रत्येक फाइल के पीछे मानवीय पहलू जुड़े होते हैं।
उन्होंने नागरिक देवो भव के मंत्र की याद दिलाते हुए अधिकारियों से हर निर्णय के केंद्र में आम जनता को रखने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि शासन हर हाल में सहानुभूतिपूर्ण, उत्तरदायी और समावेशी बना रहे।
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण करना आने वाले दशकों में हर नीति और प्रशासनिक निर्णय का उद्देश्य होना चाहिए।
अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए बताया कि वर्तमान बैच में 40 प्रतिशत से अधिक महिला अधिकारी शामिल हैं।
इस अवसर पर कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, मंत्रिमंडल सचिव टीवी सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह, एलबीएसएनएए के निदेशक श्रीराम तरणिकांति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।






























